दरोगा की मौत और एसपी सो रहे: एडीएम भाई ने लगाया आरोप, गाड़ी यहां और लाश वहां…? नामजद दर्ज कराएं केस

बस्ती। एक दरोगा की संदिग्ध मौत का मामला अब यूपी पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका है। मृतक दरोगा के छोटे भाई अरुण ने पीएम हाउस में मौजूद अधिकारियों के सामने गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बड़े भाई की मौत हो गई फिर भी सीओ कैसे बात करते रहे? पूरी घटना की रिकार्डिंग भी है। अरुण ने दावा किया कि मैं झांसी में था और 5 तारीख को लापता भाई के बारे में 6 तारीख को पिता ने फोन पर बताया। सीओ को जानकारी ही नहीं कि उनका दरोगा गायब हो गया है। ऐसे आरोपों के साथ सोशल मीडिया पर भाई का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

आरोपों का पूरा विवरण

अरुण ने पीएम हाउस पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि भाई की मौत की सूचना मिलने के बाद भी एसपी सो रहे थे। उन्होंने कहा कि गाड़ी यहां खड़ी है और लाश वहां मिली है। दरोगा कब लापता हुआ, कब मौत हुई और कब लाश मिली—इस पूरे क्रम में पुलिस की लापरवाही साफ नजर आ रही है। अरुण का दावा है कि सीओ ने मौत के बाद भी फोन पर बातचीत जारी रखी, जबकि भाई की जान जा चुकी थी। उन्होंने घटना की रिकॉर्डिंग होने का भी जिक्र किया और नामजद केस दर्ज करने की मांग की।

परिवार की व्यथा और सवाल

परिवार का कहना है कि दरोगा लापता होने के कई घंटे बाद भी पुलिस को पता नहीं चला। अरुण ने कहा कि अगर पुलिस समय पर एक्शन लेती तो शायद भाई की जान बच सकती थी। उन्होंने एसपी पर सोने का आरोप लगाते हुए कहा कि उच्च अधिकारी सो रहे थे जबकि जवान की मौत हो चुकी थी। परिवार ने न्याय की गुहार लगाई है और पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। सोशल मीडिया पर वीडियो में अरुण भावुक होकर रोते हुए आरोप लगा रहे हैं, जिससे जनता में आक्रोश बढ़ रहा है।

पुलिस का पक्ष और जांच की स्थिति

बस्ती पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। एसएसपी ने कहा कि हर पहलू की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई होगी। हालांकि परिवार का आरोप है कि पुलिस खुद जांच में पक्षपात कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन परिवार का कहना है कि रिपोर्ट में भी हेरफेर की आशंका है।

जनता में आक्रोश और सवाल

यह मामला यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।

सोशल मीडिया पर #JusticeForDaroga और #BastiPoliceLaparwahi जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।

लोग पूछ रहे हैं कि अगर एक पुलिसकर्मी की मौत पर ही

इतनी लापरवाही हो रही है तो आम जनता का क्या हाल होगा? परिवार ने नामजद

केस दर्ज कराने की मांग की है ताकि उच्च अधिकारियों पर भी जांच हो सके।

दरोगा की मौत का यह मामला अब सिर्फ एक हादसा नहीं रह गया है।

यह पुलिस विभाग में जवाबदेही, संवेदनशीलता और

त्वरित कार्रवाई की कमी को उजागर कर रहा है। परिवार की मांग है कि नामजद केस दर्ज हो और

दोषियों को सजा मिले। गोरखपुर और बस्ती में यह मामला चर्चा का

विषय बना हुआ है। न्याय की उम्मीद में परिवार और जनता इंतजार कर रही है