लोकसभा सत्र में हंगामे का दौर: बजट चर्चा कैसे बनी शिकार?
लोकसभा के हालिया सत्र में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट 2026 पर चर्चा शुरू होते ही विपक्षी दलों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। लगभग 19 घंटे तक चले इस हंगामे ने सदन की कार्यवाही को पूरी तरह ठप कर दिया। स्पीकर ओम बिरला ने सदस्यों को बार-बार चेतावनी दी, लेकिन हालात काबू में नहीं आए। विपक्ष ने महंगाई, बेरोजगारी और किसान मुद्दों पर नारे लगाए, जबकि सत्ताधारी पक्ष ने सदन चलाने की अपील की। इस घटना ने संसदीय लोकतंत्र की परिपक्वता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस सत्र में कुल 19 घंटे व्यर्थ जाने से महत्वपूर्ण विधेयक और बजट अनुमोदन में देरी हुई। स्पीकर बिरला ने कहा, “इस हाल में सदन नहीं चल सकता।” उनकी यह टिप्पणी विपक्ष के रुख पर सीधी चोट थी। लोकसभा सचिवालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ सत्रों में हंगामे के कारण 40% से अधिक समय बर्बाद हो चुका है।
विपक्ष की नारेबाजी: कारण और मांगें क्या थीं?
विपक्षी गठबंधन, जिसमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य दल शामिल थे, ने बजट को “अमीरों के पक्ष में” बताते हुए विरोध जताया। वे किसान आय दोगुनी करने के वादों पर सवाल उठा रहे थे। नारों में “मोदी सरकार इस्तीफा दो” और “किसान न्याय दो” प्रमुख थे। राहुल गांधी ने सदन से बाहर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि बजट में ग्रामीण भारत की अनदेखी हुई है।
दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष को “रचनात्मक बहस से भागने वाला” करार दिया। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने ट्वीट किया, “विपक्ष हंगामा करके जनता का ध्यान भटकाना चाहता है।” इस नारेबाजी ने न केवल बजट चर्चा रोकी, बल्कि प्रश्नकाल और शून्यकाल को भी प्रभावित किया। विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्ष की रणनीति चुनावी लाभ के लिए थी, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में।
स्पीकर ओम बिरला की नाराजगी: सदन सुचारू संचालन पर जोर
स्पीकर बिरला ने सदन में सदस्यों को संबोधित करते हुए कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “सदस्यों, लोकतंत्र में असहमति जतानी है तो बहस से। नारेबाजी से देश का नुकसान हो रहा है। इस हाल में सदन नहीं चल सकता।” बिरला ने मार्शल बुलाए और विपक्षी सांसदों को सदन से बाहर करने का आदेश दिया।
पिछले सत्रों में भी बिरला ने सख्त रुख अपनाया था, जैसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भाषण के दौरान हंगामा रोकना। संसदीय मामलों के जानकार डॉ. सुधीर पांडे कहते हैं, “स्पीकर का यह रुख संसद की गरिमा बचाने के लिए जरूरी है।” बिरला ने सदन को 19 घंटे बाद स्थगित करते हुए अगले सत्र की रूपरेखा तय की।
बजट 2026 पर चर्चा का महत्व: क्या खोया, क्या बचा?
बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर पर 11 लाख करोड़ और डिजिटल इंडिया पर फोकस था।
लेकिन हंगामे के कारण चर्चा अधर में लटक गई।
इससे अर्थव्यवस्था से जुड़े विधेयक जैसे जीएसटी संशोधन प्रभावित हुए।
आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि देरी से विकास दर पर 0.5% असर पड़ सकता है।
संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, “विपक्ष को सदन चलाने का सहयोग करना चाहिए।”
विपक्ष ने राज्यसभा में भी हंगामा जारी रखा, जहां चंद्रशेखर आजाद ने किसान मुद्दे उठाए।
कुल मिलाकर, यह घटना विपक्ष-सत्ता टकराव को उजागर करती है।
संसद सुधार की आवश्यकता: भविष्य के लिए सबक
इस हंगामे ने संसदीय सुधारों की बहस छेड़ दी। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा, “
एंटी-डिफेक्शन लॉ को मजबूत करना होगा।” सरकार ने स्पीकर को अधिक शक्तियां देने का प्रस्ताव रखा है।
जनता सोशल मीडिया पर इस मुद्दे पर बहस कर रही है,
जहां कई ने हंगामे की निंदा की।
संसद को सुचारू चलाने के लिए सभी दलों को मिलकर काम करना होगा।
यह घटना लोकतंत्र की मजबूती के लिए सबक है।
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