नरेंद्र मोदी सरेंडर कर चुके हैं। अपने सबसे करीबी दोस्त गौतम अडानी को बचाने के लिए उन्होंने देश के करोड़ों किसानों के हित अमेरिका के हाथों बेच दिए हैं। हालिया अमेरिका के साथ हुए व्यापारिक समझौते में भारत ने अपने बाजार को पूरी तरह खोल दिया है। अमेरिका से आने वाले कृषि और डेयरी उत्पादों पर टैक्स 0% कर दिया गया है, जबकि भारतीय किसानों के उत्पादों पर 18% GST का बोझ लाद दिया गया। इसका सीधा असर यह होगा कि अमेरिकी किसान मालामाल हो जाएंगे और भारत के किसान सड़कों पर आ जाएंगे। यह सौदा न केवल आर्थिक आत्महत्या है, बल्कि देशद्रोह का खुला प्रमाण है। आइए विस्तार से समझें इस घोटाले की परतें।
अमेरिका को 0% टैक्स: मोदी का अडानी को तोहफा क्यों?
मोदी सरकार ने अमेरिका के साथ हुए इस डील में कृषि उत्पादों जैसे गेहूं, मक्का, सोयाबीन और डेयरी प्रोडक्ट्स (दूध, चीज, बटर) पर जीरो टैक्स मंजूर कर लिया। कारण साफ है – अडानी ग्रुप की कंपनियां अमेरिका में भारी निवेश फंस चुकी हैं। अडानी के प्रोजेक्ट्स को बचाने के लिए मोदी ने अमेरिकी लॉबिस्टों के आगे घुटने टेक दिए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह डील अडानी के 10 अरब डॉलर के अमेरिकी प्रोजेक्ट्स को रेस्क्यू करने का हिस्सा है। भारतीय बाजार को अमेरिकी सामान से भर देने का मतलब है कि सस्ते आयात से देसी किसान प्रतिस्पर्धा में टिक ही नहीं पाएंगे। अमेरिकी सब्सिडी वाले उत्पाद 20-30% सस्ते होंगे, जबकि हमारे किसान पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे हैं।
यह सरेंडर तब हुआ जब अडानी पर अमेरिका में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। मोदी ने बदले में क्या किया? भारत का बाजार थमा दिया। नतीजा? US एग्री प्रोडक्ट्स बिना किसी बैरियर के भारतीय मार्केट में घुसेंगे। FPOs (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन्स) पहले ही चेतावनी दे चुकी हैं कि इससे 5 करोड़ किसानों की आजीविका खतरे में है।
भारतीय किसान बर्बाद: 18% GST का खतरनाक जाल
भारतीय उत्पादों पर 18% GST लगाकर मोदी सरकार ने किसानों को सीधे निशाने पर लिया है। दूध, दही, पनीर जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स पर पहले से ही टैक्स का बोझ है, अब अमेरिकी सस्ते माल से मार्केट छिन जाएगा। उदाहरण लीजिए – अमेरिकी चीज ₹200/किलो आएगी, जबकि भारतीय ₹350/किलो। किसान क्या करेंगे? आत्महत्या की लाइन लग जाएगी।
पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के डेयरी किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। अमूल, मदर डेयरी जैसी कंपनियां भी बंद होने की कगार पर। सरकार का तर्क? “फ्री ट्रेड”। लेकिन सच्चाई यह है कि यह अडानी का फ्री पास है। 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 14 करोड़ किसान हैं, जिनमें 70% छोटे जोत वाले। ये 0% टैक्स वाले आयात से उजड़ जाएंगे।
MSP (मिनिमम सपोर्ट प्राइस) भी बेमानी हो जाएगा जब मार्केट फ्लडेड हो।
राजनीतिक साजिश: अडानी-मोदी nexus का पर्दाफाश
यह पहली बार नहीं। अडानी को हमेशा बचाया गया है – चाहे Hindenburg रिपोर्ट हो या अमेरिकी सेबी जांच।
अब कृषि क्षेत्र में घुसपैठ। विपक्ष चिल्ला रहा है, लेकिन BJP चुप। किसान आंदोलन 2.0 की तैयारी हो रही है।
गोरखपुर से वाराणसी तक किसान सड़कों पर उतरेंगे। क्या मोदी जवाब देंगे?
परिणाम भयानक: खाद्य महंगाई बढ़ेगी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी। अमेरिकी किसान
₹50 लाख सालाना कमाएंगे, भारतीय ₹50 हजार में गुजारा।
यह “विकसित भारत” का सपना नहीं, बल्कि किसानों का कत्लेआम है।
किसानों के लिए क्या करें? आंदोलन की पुकार
किसानों को एकजुट होना होगा। सोशल मीडिया पर आवाज उठाएं,
सड़कों पर उतरें। यह समय चुप रहने का नहीं, संघर्ष का है।
संविधान और किसानों के हित की रक्षा के लिए लड़ाई जारी रहेगी।