मोदी सरकार का संसद में पक्षपात: निशिकांत दुबे को 6 किताबें दिखाने की छूट, राहुल गांधी को एक कोट भी नहीं
मेटा डिस्क्रिप्शन: मोदी सरकार संसद पक्षपात: निशिकांत दुबे को 6 किताबें दिखाने की छूट, राहुल गांधी को एक कोट भी नहीं। स्पीकर का दोहरा रवैया, लोकतंत्र का अपमान, नेहरू सनक और चीन बॉर्डर सच। राजनीतिक ड्रामा 2026।,
मोदी सरकार का डबल स्टैंडर्ड: विपक्ष का मुंह बंद, BJP को खुली छूट
मोदी सरकार जब सदन को डिस्टर्ब करना चाहती है, तो वो निशिकांत दुबे जैसे सांसद को बोलने के लिए खड़ा कर देती है। हालिया संसदीय सत्र में ये साफ दिखा, जहां नेता विपक्ष राहुल गांधी को एक पब्लिश हो चुकी किताब से महज एक कोट करने की इजाजत भी नहीं दी गई। वहीं, निशिकांत दुबे बेंच पर 6 किताबें लेकर बैठे थे, उन्हें सामने दिखा रहे थे और उनसे कोट कर रहे थे, लेकिन उनका माइक बंद नहीं किया गया। ये दोहरा चरित्र मोदी सरकार के संसद व्यवहार को उजागर करता है, जो लोकतंत्र की बुनियाद को कमजोर कर रहा है।
निशिकांत दुबे की 6 किताबें vs राहुल गांधी का एक कोट: स्पीकर का पक्षपात?
संसद में व्यवस्था का नाम रखने वाले स्पीकर का रवैया सवालों के घेरे में है। राहुल गांधी जब किताब से कोट करना चाहते थे, तो तुरंत रोक लगा दी गई। लेकिन निशिकांत दुबे ने घंटों फिजूल बातें कीं, नेहरू जी का नाम बार-बार लिया और किताबें लहराईं, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं। मोदी सरकार दिखाना चाहती है कि सदन में सिर्फ BJP की चलती है। ये स्पीकर के पद, संसद, लोकतंत्र और देश की जनता का खुला निरादर है। विपक्षी सांसदों का कहना है कि ये सुनियोजित रणनीति है, जिससे बहस को भटकाया जा सके।
नेता विपक्ष करोड़ों वोटरों के प्रतिनिधि: उनका मुंह बंद करना जनादेश का अपमान
नेता विपक्ष राहुल गांधी कोई एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष के प्रतिनिधि हैं। करोड़ों भारतीयों ने उन्हें वोट देकर संसद भेजा है। मोदी सरकार जब उन्हें बोलने से रोकती है, तो वो उन करोड़ों लोगों का मुंह बंद कर रही है। एक तरफ विपक्ष को चुप कराया जा रहा है,
वहीं दूसरी तरफ निशिकांत दुबे जैसे सांसदों को खड़ा कर फिजूल बहस करवाई जा रही है।
सदन में नेहरू जी का नाम लेने की सनक क्यों? ये देश का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की चाल है।
संसदीय विशेषज्ञों का मानना है कि ये लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है।
नरवणे किताब का सच छिपाना चाहती है मोदी सरकार: चीन बॉर्डर पर BJP की लाचारी
मोदी सरकार खासतौर पर पूर्व NSA अजीत डोभाल के बाद के NSA नरवणे की किताब से डर रही है।
किताब में खुलासा है कि जब चीन की सेना हमारी सरहद पर घुस आई थी,
तो सत्ता में बैठे नेता निर्णय ही नहीं ले पा रहे थे। दो घंटे बाद सरकार ने कहा- आप खुद निर्णय लो।
फिर भी BJP वाले इंदिरा गांधी और इतिहास की बातें करते हैं। ये सनक देश को गुमराह करने वाली है।
विपक्ष का आरोप है कि असली मुद्दों जैसे बॉर्डर सिक्योरिटी
, इकोनॉमी और बेरोजगारी पर बहस न हो, इसके लिए संसद को ड्रामा बनाया जा रहा है।
लोकतंत्र बचाने की जरूरत: विपक्ष की आवाज दबाना खतरनाक खेल
मोदी सरकार का ये संसद व्यवहार 2026 के राजनीतिक माहौल को और गरमा रहा है। निशिकांत दुबे की स्पीच को
छूट देकर और राहुल गांधी को रोककर सरकार अपनी तानाशाही दिखा रही है। जनता को चाहिए कि लोकतंत्र के
इस अपमान पर सवाल उठाए। क्या संसद BJP का प्राइवेट क्लब बन गई है? विपक्षी नेता कहते हैं कि ये करोड़ों वोटरों का अपमान है। समय है कि स्पीकर निष्पक्ष बने और
सदन में सभी को बराबर बोलने का मौका मिले। अन्यथा, लोकतंत्र की जड़ें कमजोर होंगी।