उत्तर प्रदेश में
एसआईआर में नेपाल मूल की बहुओं का संकट
उत्तर प्रदेश में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान एक गंभीर समस्या सामने आई है। नेपाल से शादी करके उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में बस गईं महिलाओं को वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है। भले ही वे वर्षों से यूपी में रह रही हों, घर-परिवार संभाल रही हों और निवासी हों, लेकिन भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र न होने के कारण उन्हें वोटर नहीं बनाया जा रहा। यह स्थिति हजारों परिवारों को प्रभावित कर रही है और लोकतंत्र में भागीदारी के अधिकार पर सवाल खड़े कर रही है। एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट का विशेष संशोधन किया जा रहा है, जिसमें दस्तावेजों की सख्त जांच हो रही है।
एसआईआर प्रक्रिया और नेपाल मूल महिलाओं की समस्या
उत्तर प्रदेश में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने SIR शुरू की है। इसका उद्देश्य वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा और सही बनाना है। लेकिन इस प्रक्रिया में नेपाल से शादी करके आईं महिलाओं के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। कई महिलाएं नेपाल से भारत आईं, यहां शादी हुई, बच्चे हुए, लेकिन उनके पास भारतीय नागरिकता प्रमाण पत्र (Citizenship Certificate) नहीं है। भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के अनुसार, विदेशी महिला को भारतीय नागरिक बनने के लिए पति की नागरिकता के आधार पर आवेदन करना पड़ता है, जो कई मामलों में नहीं हुआ।
एसआईआर टीम घर-घर जाकर दस्तावेज मांग रही है। जब ये महिलाएं वोटर आईडी, आधार या अन्य प्रमाण दिखाती हैं, तो भी नागरिकता प्रमाण पत्र की कमी के कारण उनका नाम काट दिया जा रहा है। कई जिलों जैसे गोरखपुर, महाराजगंज, बलिया, सिद्धार्थनगर, कुशीनगर और लखीमपुर खीरी में नेपाल सीमा से सटे इलाकों में ऐसी महिलाओं की संख्या ज्यादा है।
प्रभावित महिलाओं की व्यथा
एक प्रभावित महिला ने बताया, “मैं 15 साल से यहां हूं, तीन बच्चे हैं, सब यूपी में पैदा हुए। लेकिन मेरे पास नेपाल का पासपोर्ट है और भारतीय नागरिकता नहीं। अब वोटर लिस्ट से नाम कट गया।” कई महिलाओं ने कहा कि वे चुनाव में वोट डालना चाहती हैं, लेकिन अब उनका अधिकार छिन गया। परिवार वाले परेशान हैं क्योंकि घर की मुखिया या बहू को वोट नहीं मिल रहा। कुछ परिवारों ने कहा कि दस्तावेज बनवाने की प्रक्रिया लंबी और महंगी है, जिसे वे नहीं कर पा रहे।
कानूनी स्थिति और नियम क्या कहते हैं?
भारतीय नागरिकता अधिनियम के अनुसार, विदेशी महिला को भारतीय पुरुष से शादी के बाद 7 साल तक भारत में रहने पर नागरिकता मिल सकती है, लेकिन आवेदन जरूरी है। कई महिलाओं ने आवेदन नहीं किया या प्रक्रिया अधर में है। एसआईआर में चुनाव आयोग ने साफ निर्देश दिए हैं कि वोटर बनने के लिए भारतीय नागरिक होना अनिवार्य है। आधार और वोटर आईडी पर्याप्त नहीं, नागरिकता प्रमाण जरूरी माना जा रहा है।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
यह मुद्दा सीमा क्षेत्रों में राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष ने इसे “महिलाओं के अधिकारों पर हमला” बताया है। कई संगठन और महिला समूह इस पर आवाज उठा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि नियमों का पालन जरूरी है, लेकिन मानवीय आधार पर राहत की मांग बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि
ऐसे मामलों में विशेष अभियान चलाकर दस्तावेज बनवाने में मदद की जानी चाहिए।
आगे क्या हो सकता है?
एसआईआर प्रक्रिया जारी है। प्रभावित महिलाओं को सलाह दी जा रही है कि वे तुरंत नागरिकता के लिए आवेदन करें।
जिला प्रशासन और तहसील स्तर पर कैंप लग सकते हैं।
अगर नाम कट चुका है, तो दावा-आपत्ति के जरिए नाम जुड़वाने का मौका मिल सकता है।
लेकिन बिना नागरिकता प्रमाण के स्थायी समाधान मुश्किल है।
यह मामला यूपी में नेपाल सीमा से जुड़े लाखों परिवारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
अधिकारों की रक्षा जरूरी
नेपाल से बहू बनकर आईं महिलाएं वर्षों से भारत की मिट्टी में बस गई हैं,
लेकिन वोटिंग का अधिकार न मिलना अन्यायपूर्ण लगता है। एसआईआर अच्छा कदम है
, लेकिन मानवीय संवेदनशीलता के साथ लागू होना चाहिए।
सरकार को ऐसी महिलाओं के लिए विशेष प्रावधान और तेज प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए,
ताकि कोई भी योग्य नागरिक वोट से वंचित न रहे।
