जवाहर नवोदय विद्यालय में
नवोदय विद्यालय में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा
उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) में रविवार रात मेस में परोसे गए भोजन की खराब गुणवत्ता को लेकर छात्रों ने जबरदस्त हंगामा कर दिया। छात्रों का आरोप था कि भोजन न केवल स्वादहीन था, बल्कि उसमें बदबू आ रही थी और कई दिनों से ऐसी शिकायतें अनसुनी हो रही थीं। इस मुद्दे पर मेस इंचार्ज और वार्डन से तीखी बहस हुई, जिसके बाद छात्रों ने भोजन करने से इनकार कर दिया और हॉस्टल परिसर में जमा होकर जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति बिगड़ने पर प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और लगभग 50 छात्रों को तत्काल घर भेज दिया गया। यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में नवोदय विद्यालयों की मेस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
घटना का पूरा विवरण: क्या हुआ रविवार रात?
रविवार शाम जब छात्र डिनर के लिए मेस पहुंचे, तो भोजन देखते ही कई छात्रों ने आपत्ति जताई। दाल में कीड़े, सब्जी में कड़वाहट और रोटी सख्त होने का आरोप लगा। छात्रों ने कहा कि यह पहली बार नहीं है—पिछले कई हफ्तों से भोजन की क्वालिटी खराब है, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। जब छात्रों ने मेस इंचार्ज से शिकायत की, तो बात बढ़ गई। वार्डन ने छात्रों को चुप रहने को कहा, जिससे गुस्सा और भड़क गया। नाराज छात्रों ने मेस से बाहर निकलकर हॉस्टल ग्राउंड में एकत्र हो गए और “खराब भोजन बंद करो”, “हमारे हक की रोटी दो” जैसे नारे लगाए। कुछ छात्रों ने प्लेटें जमीन पर पटक दीं, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
प्रिंसिपल और अन्य स्टाफ पहुंचे, लेकिन छात्र शांत नहीं हुए। रात करीब 10 बजे तक हंगामा जारी रहा। सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन ने फैसला लिया कि 50 सबसे सक्रिय छात्रों को तुरंत घर भेज दिया जाए। इन छात्रों के अभिभावकों को सूचना दी गई और उन्हें बस से उनके गांव पहुंचाया गया। स्कूल प्रशासन ने कहा कि यह कदम अनुशासन बनाए रखने के लिए जरूरी था।
छात्रों की पुरानी शिकायतें और मेस व्यवस्था पर सवाल
नवोदय विद्यालयों में मेस व्यवस्था ग्रामीण प्रतिभाशाली छात्रों के लिए मुफ्त आवासीय शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन कई JNV में भोजन की गुणवत्ता, मात्रा और स्वच्छता को लेकर शिकायतें आम हैं। छात्रों का कहना है कि ठेकेदारों द्वारा सस्ता सामान इस्तेमाल किया जाता है, जिससे स्वास्थ्य प्रभावित होता है। इस घटना से पहले भी कई बार लिखित शिकायतें दी गई थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अब इस हंगामे ने मेस ठेकेदार, वार्डन और प्रिंसिपल की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
स्कूल प्रशासन ने सोमवार सुबह बैठक बुलाई और मेस की जांच शुरू कर दी।
प्रिंसिपल ने कहा कि भोजन की गुणवत्ता सुधारने के लिए नए निर्देश दिए गए हैं और
ठेकेदार को चेतावनी जारी की गई है। 50 छात्रों को घर भेजने को “अनुशासनात्मक कदम” बताया गया,
लेकिन अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें वापस बुलाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
नवोदय विद्यालयों में मेस संकट: बड़ा मुद्दा क्यों?
नवोदय विद्यालय ग्रामीण भारत की प्रतिभा को निखारने का माध्यम हैं, लेकिन मेस जैसी बुनियादी सुविधाओं में खामी छात्रों के मनोबल को तोड़ रही है। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि ठेकेदारों की मिलीभगत और निगरानी की कमी से भोजन की समस्या बनी रहती है।
इस घटना ने पूरे देश के नवोदय समुदाय में चर्चा छेड़ दी है।
अभिभावक और पूर्व छात्र सोशल मीडिया पर #BetterFoodInJNV जैसे हैशटैग से आवाज उठा रहे हैं।
निष्कर्ष: छात्रों की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता
यह हंगामा सिर्फ एक स्कूल की घटना नहीं, बल्कि नवोदय व्यवस्था में सुधार की मांग है।
छात्रों का गुस्सा जायज है—अच्छा भोजन उनका अधिकार है।
प्रशासन को पारदर्शी जांच, ठेकेदारों पर सख्ती और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करनी होगी।
अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
ग्रामीण शिक्षा का सपना तभी पूरा होगा जब छात्रों की बुनियादी जरूरतें पूरी होंगी।