सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में आयकर विभाग और आरबीआई गवर्नर (पूर्व राजस्व सचिव) को आईआरएस अधिकारी के साथ लंबे समय तक “व्यवस्थित उत्पीड़न” के लिए कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इसे “शक्ति के दुरुपयोग” और “साजिश” करार दिया। कोर्ट ने विभाग पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और अधिकारी की आईटीएटी सदस्यता के लिए नई चयन प्रक्रिया का आदेश दिया। यह मामला नौकरशाही में बदले की कार्रवाई और स्वतंत्र जांच की सुरक्षा को उजागर करता है।
केस का पूरा बैकग्राउंड: प्रमोद बजाज की कहानी
प्रमोद बजाज 1980 में सेना में कमीशन हुए थे, लेकिन ऑपरेशन के दौरान विकलांगता के कारण रिलीज हो गए। उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास की और 1990 में आईआरएस में शामिल हुए। 2012 तक वे इनकम टैक्स कमिश्नर बने। कोर्ट के अनुसार, प्रमोशन के बावजूद उन्हें फर्जी मेमोरेंडम जारी कर परेशान किया गया, जो बाद में ड्रॉप हुआ। फिर भी, उन्हें जबरन रिटायर किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में इस रिटायरमेंट को रद्द किया और विभाग की “मालाफाइड” कार्रवाई पर सख्त टिप्पणी की।
अब 2024 में आईटीएटी सदस्यता के लिए चयन समिति (एससीएससी) ने उनकी उम्मीदवारी खारिज कर दी। कोर्ट ने पाया कि पूर्व राजस्व सचिव (अब आरबीआई गवर्नर) की समिति में मौजूदगी “पूर्वाग्रह की आशंका” पैदा करती है। जस्टिस ने कहा कि उन्हें खुद रिक्यूज होना चाहिए था। यह उत्पीड़न 10 साल से अधिक चला, जिसमें विभाग ने उन्हें निशाना बनाया।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख बयान और निर्देश
बेंच ने कहा, “अधिकारियों को डराने-धमकाने की साजिश है। क्या यह लोकतंत्र है? अधिकारी डरेंगे तो कानून कौन मानेगा?” कोर्ट ने विभाग को “ट्रंप्ड-अप” आरोप लगाने और उच्च-स्तरीय दुरुपयोग के लिए फटकार लगाई। मुख्य निर्देश:
- एससीएससी की 2024 की खारिजगी रद्द।
- 4 हफ्ते में नई बैठक, गवर्नर को बाहर रखकर।
- परिणाम 2 हफ्ते में अधिकारी को सूचित।
- विभाग पर 5 लाख रुपये का कॉस्ट। कोर्ट ने कहा, “टैक्स अधिकारी सर्वेसर्वा नहीं हैं।” यह फैसला अन्य मामलों में मिसाल बनेगा।
राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव
विपक्ष ने इसे मोदी सरकार की “नौकरशाही कुचलने” की नीति बताया।
कांग्रेस ने कहा कि स्वतंत्र अधिकारी डर में काम नहीं कर पाएंगे। आईआरएस एसोसिएशन ने फैसले का स्वागत किया।
पूर्व सीएजी विनोद राय ने इसे “स्वतंत्र जांच के लिए जरूरी” बताया।
भाजपा ने इसे आंतरिक मामला कहा।
मामला उत्तर प्रदेश से जुड़ा होने से स्थानीय स्तर पर सुर्खियां बटोर रहा है।
वित्त मंत्रालय ने आंतरिक जांच शुरू की। विशेषज्ञ मानते हैं कि
इससे टैक्स संग्रह और जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, लेकिन नौकरशाही में जवाबदेही बढ़ेगी।
न्यायपालिका की निगरानी मजबूत
यह फैसला बताता है कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक दुरुपयोग पर सख्त नजर रख रहा है। आईआरएस अधिकारी
अब बिना डर के ड्यूटी कर सकेंगे। आने वाली सुनवाई में विभाग को विस्तृत रिपोर्ट देनी होगी।
यह घटना नौकरशाही सुधार और शक्ति संतुलन की जरूरत को रेखांकित करती है