उत्सव-ए-बचपन' कार्निवाल में बच्चों का जोरदार प्रदर्शन
बचपन का जश्न बना कार्निवाल
गोरखपुर में बच्चों के लिए आयोजित ‘उत्सव-ए-बचपन’ कार्निवाल ने शहर में एक अलग ही रंग बिखेर दिया। यह आयोजन बच्चों की छुपी प्रतिभा को सामने लाने और उन्हें मंच प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया। विभिन्न स्कूलों के सैकड़ों बच्चे इस कार्निवाल में शामिल हुए, जहां चित्रकला प्रतियोगिता और रैंपवॉक ने सबका मन मोह लिया। उत्साह, रंग और मासूम हंसी से भरा यह कार्यक्रम गोरखपुर के बच्चों के लिए यादगार बन गया।
कार्निवाल का भव्य आयोजन और मुख्य आकर्षण
कार्निवाल का आयोजन गोरखपुर के एक प्रतिष्ठित स्कूल परिसर में हुआ, जहां सुबह से ही बच्चे अपने रंग-बिरंगे परिधानों में पहुंचने लगे। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई, जिसके बाद बच्चों ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया। मुख्य आकर्षण रहे:
- चित्रकला प्रतियोगिता – बच्चों ने पर्यावरण, स्वच्छता, बचपन और स्वदेशी विषयों पर शानदार चित्र बनाए। जजों ने 5-8 वर्ष, 9-12 वर्ष और 13-15 वर्ष की तीन श्रेणियों में प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए।
- रैंपवॉक – बच्चे पारंपरिक, आधुनिक और थीम आधारित परिधानों में रैंप पर चले। लड़कियों ने लहंगा-चोली और लड़कों ने कुर्ता-पायजामा, शेरवानी में कमाल दिखाया। रैंप पर बच्चों का आत्मविश्वास और मुस्कान देख सब मंत्रमुग्ध हो गए।
कार्यक्रम में नृत्य, गीत और नुक्कड़ नाटक भी प्रस्तुत किए गए। माता-पिता और शिक्षकों ने बच्चों की प्रतिभा देखकर तालियां बजाईं।
बच्चों की प्रतिभा और माता-पिता का उत्साह
कार्निवाल में शामिल बच्चे 5 से 15 वर्ष के थे। चित्रकला में पर्यावरण संरक्षण पर बने चित्रों ने जजों का दिल जीत लिया।
एक 7 वर्षीय बच्ची ने कहा, “
मैंने गंगा मैया को साफ दिखाया क्योंकि गंदगी से मछलियां मर रही हैं।” रैंपवॉक में बच्चे इतने
आत्मविश्वास से चले कि बड़े-बड़े मॉडल भी फेल लगें। माता-पिता ने बताया कि
ऐसे मंच बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाते हैं और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
आयोजन का उद्देश्य और सफलता
‘उत्सव-ए-बचपन’ का मुख्य उद्देश्य बच्चों की रचनात्मकता को बढ़ावा देना और उन्हें मंच पर लाना था।
आयोजकों ने बताया कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में
महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्निवाल में शामिल बच्चों को सर्टिफिकेट,
मेडल और उपहार दिए गए।
कार्यक्रम की सफलता से उत्साहित आयोजकों ने कहा कि यह अब हर साल आयोजित किया जाएगा।
बचपन का उत्सव, शहर का गौरव
‘उत्सव-ए-बचपन’ कार्निवाल ने गोरखपुर में बच्चों की प्रतिभा और उत्साह को नई ऊंचाई दी। चित्रकला और रैंपवॉक में दिखी
मासूम प्रतिभा ने सभी को प्रभावित किया। ऐसे आयोजन न केवल बच्चों का मनोरंजन करते हैं,
बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और रचनात्मकता भी प्रदान करते हैं।
गोरखपुर के बच्चे अब तैयार हैं—कल का भारत बनाने के लिए। जय हो बचपन के जश्न की!