बजट 2026 की आलोचना
साथियों, जय भीम, जय निषाद राज! आज के बजट ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकार के पास ‘आज’ की समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं है। जब जनता महंगाई, बेरोजगारी और अपनी डूबती आजीविका का हिसाब मांगती है, तो सरकार 2047 का झुनझुना थमा देती है। यह बजट कोई विजन नहीं है, बल्कि वर्तमान की नाकामियों को छिपाने की कोशिश है। 2014 से 2026 तक का सफर असफलताओं की दास्तां है, जहां गरीब और मछुआरा समाज जैसे तबके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। सरकार की नीतियां जनता की नहीं, बल्कि पूंजीपतियों की हित साधती नजर आती हैं।
बजट की कमियां: वर्तमान की अनदेखी
सवाल बहुत सीधा है: जिस परिवार को आज रोटी की तलाश है, उसे 20 साल बाद के महल का सपना क्यों दिखाया जा रहा है? 2014 से 2026 तक का सफर नाकामियों की एक ऐसी दास्तां बन चुका है, जिसे छिपाने के लिए अब सरकार के पास भविष्य की कल्पनाओं के सिवा कुछ नहीं बचा। मेरे मछुआरा समाज के भाइयों और गरीब जनता के पसीने की कोई कीमत इस बजट में नहीं दिखी। जब वर्तमान की नींव ही कमजोर है, तो 2047 की इमारत कैसे खड़ी होगी? सरकार बातों के जाल बुनने में माहिर है, लेकिन हम हक की लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे। अब वक्त आ गया है कि हम कागजी सपनों को नहीं, बल्कि अपने आज के अधिकारों को पहचानें।
उधार की सोच और कोरी कल्पना
यह बजट कोई विजन नहीं है, बल्कि: उधार की सोच—विदेशी किताबों और नीतियों की नकल करके उसे भारतीय गरीब पर थोपने की कोशिश। कोरी कल्पना—राजनीति के चश्मे से बुना गया एक ऐसा ताना-बाना, जिसका हकीकत की जमीन से कोई वास्ता नहीं। वक्त की बर्बादी—हमारे वर्तमान को एक अनिश्चित भविष्य की भेंट चढ़ाया जा रहा है। मछुआरा समाज जैसे समुदायों की आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है, लेकिन बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं। महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार मौन है, जबकि 2047 के सपने बेचे जा रहे हैं। यह बजट गरीबों के लिए नहीं, बल्कि अमीरों की जेब भरने वाला साबित होगा।
हक की लड़ाई और जनता की आवाज
मेरे मछुआरा समाज के भाइयों और गरीब जनता के पसीने की कोई कीमत
इस बजट में नहीं दिखी। जब वर्तमान की नींव ही कमजोर है,
तो 2047 की इमारत कैसे खड़ी होगी? सरकार बातों के जाल बुनने में माहिर है,
लेकिन हम हक की लड़ाई लड़ने से पीछे नहीं हटेंगे।
अब वक्त आ गया है कि हम कागजी सपनों को नहीं,
बल्कि अपने आज के अधिकारों को पहचानें। जय भीम और जय निषाद राज का नारा
हमें एकजुट करता है। बसपा जैसे दल गरीबों की आवाज बुलंद करते रहेंगे।
सच्चाई के साथ आगे बढ़ें
हक की बात, सच के साथ। यह बजट वर्तमान की समस्याओं का समाधान नहीं है,
बल्कि भविष्य के बहाने से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
मछुआरा समाज और गरीब वर्ग को एकजुट होकर अपनी
आवाज बुलंद करनी होगी। 2047 का चिराग तभी जल सकता है,
जब आज का अंधेरा दूर हो। जय भीम, जय निषाद राज!
आपका, राज कपूर निषाद (बसपा नेता/प्रदेश अध्यक्ष, फिशरमैन आर्मी)
