वाराणसी के नमो घाट पर मंगलवार को मां गंगा निषाद राज सेवा समिति के नेतृत्व में दर्जनों नाविकों ने वाटर टैक्सी जेटी और हाइड्रोजन चालित जलयानों के प्रस्तावित संचालन के खिलाफ पुलिस चौकी पर धरना दिया। समिति अध्यक्ष प्रमोद माझी ने चौकी प्रभारी हरिशंकर सिंह से 25 मिनट तक विस्तृत वार्ता की, जिसमें पारंपरिक नाव संचालन पर खतरे की पूरी बात रखी। नाविकों ने स्पष्ट किया कि ये आधुनिक योजनाएं गंगा पर निर्भर निषाद समाज की आजीविका को पूरी तरह छीन लेंगी। यह विरोध प्रदर्शन गंगा के पारंपरिक नाविकों और पर्यटन-आधारित आधुनिक परिवहन के बीच टकराव का प्रतीक बन गया है।
निषाद समाज की मुख्य आपत्तियां
निषाद समाज का कहना है कि गंगा में वाटर टैक्सी जेटी और हाइड्रोजन जहाजों से पारंपरिक नावों का संचालन असंभव हो जाएगा, जिससे हजारों परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे। प्रमोद माझी ने बताया कि मंडलायुक्त, नगर आयुक्त, जिलाधिकारी और डीसीपी काशी को पहले ही लिखित शिकायत भेजी गई है। नाविकों ने मांग की कि इन योजनाओं को स्थानीय सहमति के बिना लागू न किया जाए, क्योंकि वे वर्षों से गंगा पर ही गुजारा कर रहे हैं। उनका तर्क है कि आधुनिक जहाजों से गंगा की धारा प्रभावित होगी, नावों की जगह कम होगी और यात्रियों का रुझान महंगे विकल्प की ओर जाएगा।
हाइड्रोजन वाटर टैक्सी का बैकग्राउंड
देश की पहली हाइड्रोजन चालित वाटर टैक्सी दिसंबर 2025 में केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने नमो घाट से लॉन्च की थी, जो 50 यात्रियों को ले जा सकती है। यह 24 मीटर लंबा कैटामरान हाइड्रोजन ईंधन सेल, बैटरी और सौर ऊर्जा से चलता है, प्रदूषण मुक्त है और नमो घाट से रविदास घाट तक 5 किमी की दूरी तय करता है। सरकार इसे पर्यटन बढ़ावा और स्वच्छ गंगा का प्रतीक मान रही है, लेकिन नाविक इसे अपनी मौत का फरमान बता रहे हैं। किराया 500 रुपये होने से आम यात्री भी दूर रह सकते हैं, जबकि नाविक सस्ते दामों पर सेवा देते हैं।
पुलिस का रुख और आगे की कार्रवाई
चौकी प्रभारी हरिशंकर सिंह ने बताया कि नाविकों ने कोई लिखित ज्ञापन नहीं सौंपा, लेकिन उनकी बात सुनी गई। उन्होंने कहा कि मामला उच्च अधिकारियों का है और ऊपर से निर्देश मिलने पर ही कदम उठाया जाएगा। निषाद समिति ने चेतावनी दी कि अगर जेटी और जहाज हटे नहीं, तो आंदोलन तेज होगा। यह घटना 2023 के पुराने वाटर टैक्सी विरोध की याद दिलाती है, जब नाविकों ने दो दिन नावें बंद कर दी थीं।
गंगा परिवहन का भविष्य और प्रभाव
वाटर टैक्सी से पर्यटन तो बढ़ेगा, लेकिन निषाद समाज की 50 सीट क्षमता वाली
इलेक्ट्रिक-हाइड्रोजन नावें पारंपरिक नाविकों को बर्बाद कर देंगी।
वाराणसी जैसे धार्मिक शहर में गंगा पर निर्भर लाखों लोग प्रभावित होंगे,
इसलिए स्थानीय हितों को प्राथमिकता देने की जरूरत है। नाविकों का कहना है कि
सरकार पर्यटन बढ़ाने के नाम पर पारंपरिक आजीविका को खत्म कर रही है।
निष्कर्ष: स्थानीय हितों की रक्षा जरूरी
यह विरोध प्रदर्शन न केवल निषाद समाज की आजीविका का सवाल है,
बल्कि गंगा पर पारंपरिक संस्कृति और आधुनिक विकास के बीच संतुलन का भी है।
प्रशासन को नाविकों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए,
ताकि स्वच्छ गंगा अभियान और स्थानीय लोगों के हित दोनों सुरक्षित रहें।
वाराणसी में गंगा की गोद में बसे नाविकों का संघर्ष जारी है।
