Union Budget 2026 से पहले IBC में सुधार
Union Budget 2026 से पहले IBC को मजबूत बनाने की मांग तेज
नई दिल्ली: आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) को और प्रभावी बनाने की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों और कॉरपोरेट कानून के जानकारों का कहना है कि दिवाला समाधान मामलों में लगातार हो रही देरी अब गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है। IBC के तहत औसत समाधान समय अभी भी 500-600 दिनों से अधिक है, जबकि कानून में निर्धारित समयसीमा 330 दिन है। इस देरी से निवेशकों का भरोसा प्रभावित हो रहा है और आर्थिक पुनरुद्धार की प्रक्रिया धीमी पड़ रही है।
दिवाला मामलों में देरी के मुख्य कारण
विशेषज्ञों के अनुसार देरी के पीछे निम्नलिखित प्रमुख कारण हैं:
- NCLT (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल) में बेंचों की अपर्याप्त संख्या
- जजों और तकनीकी सदस्यों की कमी
- इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सिस्टम की कमजोरी
- बार-बार एडजर्नमेंट और पक्षकारों द्वारा टालमटोल
- NCLAT और सुप्रीम कोर्ट में अपीलों का बोझ
इन कारणों से कई बड़े केस जैसे जेट एयरवेज, DHFL, रिलायंस कम्युनिकेशंस, और कुछ हालिया बड़े कॉरपोरेट मामलों में समाधान 3-4 साल तक खिंच गया है।
विशेषज्ञों की प्रमुख मांगें – बजट 2026 में क्या उम्मीद?
कॉरपोरेट लॉ एक्सपर्ट्स, इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल्स और इंडस्ट्री चैंबर्स ने बजट से पहले केंद्र सरकार से निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- NCLT में बेंचों की संख्या बढ़ाई जाए – वर्तमान में देशभर में 16 NCLT बेंच हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कम से कम 25-30 बेंच होने चाहिए।
- जजों और तकनीकी सदस्यों की भर्ती तेज की जाए – खाली पदों को तुरंत भरा जाए।
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जाए – ई-फाइलिंग, वर्चुअल हियरिंग और केस मैनेजमेंट सिस्टम को अपग्रेड किया जाए।
- IBC में नए संशोधन – प्री-पैकेज्ड इंसॉल्वेंसी को और आसान बनाना, क्रॉस-बॉर्डर इंसॉल्वेंसी फ्रेमवर्क को मजबूत करना और छोटे मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया।
- NCLT कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए – रजिस्ट्रार, स्टेनोग्राफर और क्लर्क की कमी दूर की जाए।
इन मांगों को CII, FICCI, Assocham और IBBI (इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया) ने भी समर्थन दिया है।
बजट 2026 में IBC सुधार से क्या लाभ?
यदि बजट में इन मांगों को जगह मिलती है तो:
- औसत समाधान समय 330 दिनों के करीब आ सकता है।
- रिजॉल्यूशन वैल्यू में 10-15% की बढ़ोतरी संभव।
- विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।
- बैंकिंग सेक्टर के NPA रिजॉल्यूशन में तेजी आएगी।
- स्टार्टअप और MSME के लिए दिवाला प्रक्रिया आसान बनेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि IBC अब भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है। लेकिन इसकी सफलता के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और मानव संसाधन में निवेश जरूरी है।