विश्वविद्यालय परिसर में
विश्वविद्यालय परिसर में सवर्ण छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू
उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख विश्वविद्यालय में शुक्रवार को एक समाज के छात्रों द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी ने पूरे कैंपस में विवाद पैदा कर दिया। इस टिप्पणी का विरोध करते हुए सवर्ण समाज से जुड़े छात्रों ने शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा या उग्रता से दूर रहते हुए केवल अपनी बात और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आए हैं।
आपत्तिजनक टिप्पणी से भड़की नाराजगी
छात्रों के अनुसार, शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान एक समूह ने सवर्ण समाज के छात्रों और उनके अधिकारों पर आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणी की। इस टिप्पणी को जातिगत पूर्वाग्रह से प्रेरित बताते हुए सवर्ण छात्रों ने इसे अस्वीकार्य करार दिया। उन्होंने कहा कि ऐसी टिप्पणियां न केवल व्यक्तिगत अपमान हैं, बल्कि संविधान के मूल सिद्धांतों – खासकर समानता के अधिकार – पर भी हमला हैं।
अनुच्छेद 14 को मौलिक अधिकार के रूप में रखा सामने
प्रदर्शन का मुख्य फोकस भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 पर रहा। छात्रों ने कैंपस में घूम-घूम कर पोस्टर, प्लेकार्ड और मौखिक रूप से यह संदेश दिया कि:
- अनुच्छेद 14 मौलिक कर्तव्य नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार है।
- यह सुनिश्चित करता है कि कानून की नजर में सब बराबर हैं।
- समान परिस्थितियों में सभी को समान व्यवहार मिलना चाहिए।
- कोई भी टिप्पणी या व्यवहार जो इस अधिकार का उल्लंघन करे, अस्वीकार्य है।
लॉ फैकल्टी के सामने छात्रों ने एक-दूसरे से खुली चर्चा की। कई छात्रों ने कहा, “जब हम अपने अधिकार की बात करते हैं, आर्टिकल 14 की बात करते हैं, तो कुछ लोगों को दिक्कत होती है। लेकिन हम चुप नहीं बैठेंगे। शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखेंगे और संविधान की रक्षा करेंगे।”
प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, पुलिस की मौजूदगी
प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा। छात्रों ने नारे लगाए, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा या तोड़फोड़ नहीं की। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस ने स्थिति पर नजर रखी। कैंपस में अतिरिक्त बल तैनात किया गया, हालांकि कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। छात्र नेताओं ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना और अपनी आवाज बुलंद करना है, न कि किसी को उकसाना।
छात्रों की मुख्य मांगें
- आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले छात्रों/समूह पर विश्वविद्यालय अनुशासन समिति द्वारा कार्रवाई।
- कैंपस में जातिगत टिप्पणियों और भेदभाव पर सख्त नीति लागू करना।
- सभी छात्रों के बीच संवाद और संवैधानिक मूल्यों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।
- अनुच्छेद 14 और समानता के अधिकार पर सेमिनार और चर्चा सत्र।
विश्वविद्यालय में बढ़ता तनाव और संवैधानिक बहस
यह प्रदर्शन विश्वविद्यालय परिसर में बढ़ते जातिगत तनाव और संवैधानिक अधिकारों की
बहस को उजागर करता है। छात्रों का कहना है कि जब भी
कोई समूह अपने अधिकारों की बात करता है, तो दूसरा पक्ष उसे दबाने की कोशिश करता है।
प्रदर्शनकारियों ने आश्वासन दिया कि वे आगे भी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते रहेंगे।