गोरखपुर/बिजनौर, 30 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश और हरियाणा को जोड़ने वाला पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे (Panipat-Gorakhpur Expressway) अब पूर्वांचल के विकास की नई उम्मीद बन चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा प्रस्तावित इस 747 किलोमीटर लंबे ग्रीनफील्ड हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे के लिए बिजनौर जिले में 131 गांवों की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज हो गई है। डीएम जसजीत कौर ने बिजनौर, नजीबाबाद, नगीना और धामपुर तहसीलों के इन गांवों में अधिग्रहण को पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इससे पूर्वांचल के लाखों लोगों को तेज कनेक्टिविटी, रोजगार और आर्थिक उछाल मिलेगा।
बिजनौर में भूमि अधिग्रहण: 131 गांव चिह्नित, 55 किमी हिस्सा
बिजनौर जिले में एक्सप्रेसवे का हिस्सा लगभग 55 किलोमीटर लंबा होगा। एनएच-734 के km 86.860 से 142.195 तक प्रस्तावित इस खंड के लिए 2,729 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है। प्रशासन ने इन 131 गांवों में भूमि बैनामे, उपयोग परिवर्तन और अनाधिकृत निर्माण पर पूर्ण रोक लगा दी है। एसडीएम और सब-रजिस्ट्रार को निर्देश जारी किए गए हैं कि कोई भी लेन-देन न हो। यह कदम विवादों से बचाव और प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए उठाया गया है। एनएचएआई ने एसएलओ (स्पेशल लैंड एक्विजिशन ऑफिसर) नियुक्त कर दिया है, जो अधिग्रहण का काम संभालेगा।
एक्सप्रेसवे मुजफ्फरनगर से बिजनौर में प्रवेश कर धामपुर तहसील से मुरादाबाद की ओर जाएगा। सर्वे पूरा हो चुका है और किसानों की राय लेकर मुआवजा निर्धारित किया जा रहा है।
एक्सप्रेसवे का पूरा मार्ग और विस्तार: 22 जिलों को कनेक्टिविटी
यह हाई-स्पीड एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर पानीपत से शुरू होकर शामली, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, अमरोहा, संभल, रामपुर, बरेली, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, गोरखपुर और कुशीनगर से गुजरेगा। कुल 22 जिले जुड़ेंगे। कुशीनगर में इसे सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से जोड़ा जाएगा, जिससे पूर्वांचल से नेपाल बॉर्डर और पूर्वी भारत तक पहुंच आसान होगी।
गोरखपुर मंडल में 86.24 किमी हिस्सा 133 गांवों (सिद्धार्थनगर 37, संतकबीरनगर 29, गोरखपुर 46, कुशीनगर आदि) से गुजरेगा।
कुल लंबाई 747-750 किमी है, और निर्माण 2026 में शुरू होने की उम्मीद है।
आर्थिक और सामाजिक लाभ: भूमि मूल्य उछाल, रोजगार और पर्यटन बूस्ट
इस एक्सप्रेसवे से प्रभावित क्षेत्रों में भूमि मूल्यों में भारी उछाल आएगा।
नए उद्योग, लॉजिस्टिक्स पार्क, होटल, ढाबे और सर्विस सेक्टर फले-फूलेगा।
पूर्वांचल के कुशीनगर, गोरखपुर जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच तेज होगी। व्यापार,
कृषि उत्पादों की ढुलाई आसान होगी और रोजगार के हजारों अवसर पैदा होंगे।
किसानों को मुआवजा मिलने से आर्थिक मजबूती आएगी,
लेकिन अधिग्रहण में पारदर्शिता और उचित मुआवजा जरूरी है।
यह परियोजना यूपी की इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति का हिस्सा है, जो पूर्वी और पश्चिमी यूपी को जोड़कर समावेशी विकास सुनिश्चित करेगी।
NHAI और राज्य सरकार तेजी से काम कर रही है – जल्द ही निर्माण शुरू होने की उम्मीद।