गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे
गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे: भूमि अर्जन प्रक्रिया में तेजी
गोरखपुर-सिलीगुड़ी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (Gorakhpur-Siliguri Expressway) के निर्माण के लिए भूमि अर्जन प्रक्रिया तेज हो गई है। तहसील सदर क्षेत्र के 12 राजस्व गांवों में कुल 69.57 हेक्टेयर जमीन प्रभावित होगी, जिस पर अब खरीद-बिक्री पूरी तरह रोक लगा दी गई है। विशेष भूमि अधिग्रहण अधिकारी (SLO) हिमांशु वर्मा ने तहसील सदर के उप निबंधक प्रथम एवं द्वितीय को पत्र जारी कर संबंधित गाटों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने की सूचना दी है। यह फैसला एनएचएआई के निर्देश पर लिया गया है, ताकि भूमि अर्जन प्रक्रिया पूरी होने तक कोई ट्रांसफर या बिक्री न हो सके। एक्सप्रेसवे जगदीशपुर जंगल कौड़िया बाईपास के करमहा से शुरू होकर कुशीनगर के हाटा, कसया, तमकुहीराज होते हुए सिलीगुड़ी तक जाएगा।
रजिस्ट्री रोक का कारण और प्रभावित जमीनें
रजिस्ट्री पर रोक इसलिए लगाई गई है क्योंकि एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट में आने वाली निजी कृषि भूमि, सरकारी चकमार्ग, नाली, रास्ता, नवीन परती और नदी के कुछ हिस्से शामिल हैं। इन जमीनों पर कोई भी क्रय-विक्रय नहीं होगा जब तक अर्जन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती। प्रभावित गांव और जमीन की मात्रा इस प्रकार है:
- करमहा तप्पा पतरा: 5.4402 हेक्टेयर
- महराजी तप्पा पतरा: 7.9063 हेक्टेयर
- सोनवे गोनाराहा: 4.6814 हेक्टेयर
- अगया तप्पा पतरा: 8.4705 हेक्टेयर
- मटिहनिया सुमाली: 4.3276 हेक्टेयर
- उस्का: 2.2417 हेक्टेयर
- नैयापार खुर्द: 5.4738 हेक्टेयर
- भरपुरवा: 7.1609 हेक्टेयर
- महुअवा खुर्द: 4.01510 हेक्टेयर
- राउतपार तप्पा केवटली: 10.557 हेक्टेयर
- हेमछापर: 5.013 हेक्टेयर
- लुहसी: 4.284 हेक्टेयर
कुल 69.57 हेक्टेयर में ये सभी शामिल हैं। प्रभावित किसानों को मुआवजा निर्धारित नियमों के अनुसार मिलेगा, लेकिन फिलहाल कोई भी लेन-देन नहीं हो सकेगा।
3D सर्वे और आगे की प्रक्रिया
एनएचएआई के निर्देश पर 69.57 हेक्टेयर जमीन का 3D सर्वे किया जाएगा। यह सर्वे भूमि की सटीक माप, संरचना और उपयोग का डिजिटल मैप तैयार करेगा, जो अर्जन और मुआवजा निर्धारण में मदद करेगा। सर्वे के बाद प्रभावित किसानों को नोटिस जारी होंगे और दस्तावेज जमा करने का समय दिया जाएगा। गोरखपुर जिले में कुल 69 हेक्टेयर (तहसील सदर के 23 गांवों से) का अधिग्रहण प्रस्तावित है, जबकि कुशीनगर में 492 हेक्टेयर शामिल हैं। कुल मिलाकर गोरखपुर-कुशीनगर में 561 हेक्टेयर का अधिग्रहण होगा।
एक्सप्रेसवे का महत्व और लाभ
यह 520-550 किमी लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे भारत माला परियोजना का हिस्सा है। वर्तमान में गोरखपुर से सिलीगुड़ी का सफर 15 घंटे लगता है, जो घटकर 6 घंटे रह जाएगा। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाला यह कॉरिडोर व्यापार, पर्यटन और रोजगार बढ़ाएगा। गोरखपुर क्षेत्र में कनेक्टिविटी मजबूत होगी, खासकर नेपाल बॉर्डर के निकट। निर्माण लागत 32,000-37,500 करोड़ रुपये अनुमानित है, और 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है।
किसानों की चिंता और सरकारी आश्वासन
किसानों में मुआवजे और पुनर्वास को लेकर चिंता है, लेकिन अधिकारी आश्वस्त कर रहे हैं कि नियमों के अनुसार उचित मुआवजा दिया जाएगा। रजिस्ट्री रोक से जमीन की कीमतों पर असर पड़ सकता है, लेकिन यह अर्जन प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए जरूरी है। एनएचएआई और जिला प्रशासन जल्द नोटिस जारी करेंगे।
यह कदम एक्सप्रेसवे निर्माण को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण है
