एआई अपग्रेड का ऐलान: गोरखपुर शिक्षा में नई क्रांति
उत्तर प्रदेश का प्रमुख शिक्षा केंद्र गोरखपुर अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। शिक्षा विभाग के नवीनतम निर्देशों के मुताबिक, गोरखपुर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों, कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में एआई को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। यह अपग्रेड भविष्य की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है, जहां एआई सिर्फ एक अलग विषय नहीं रहेगा, बल्कि हर डिसिप्लिन का अभिन्न अंग बन जाएगा। डीआईईटी (DIET), मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT), गोरखपुर विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों में यह बदलाव 2026-27 शैक्षणिक सत्र से लागू होगा। छात्रों को कोडिंग, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स, नैचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग जैसी स्किल्स सिखाई जाएंगी, जो उन्हें ग्लोबल जॉब मार्केट में प्रतिस्पर्धी बनाएंगी।
हर विषय में एआई का समावेश: क्या बदलेगा सिलेबस?
एआई का एकीकरण सभी विषयों में होगा, जिससे पारंपरिक पढ़ाई पूरी तरह बदल जाएगी। कुछ प्रमुख उदाहरण:
- गणित में: एआई अल्गोरिदम से प्रॉब्लम सॉल्विंग, ऑटोमेटेड कैलकुलेशन और प्रेडिक्टिव मॉडलिंग सिखाई जाएगी।
- विज्ञान में: प्रेडिक्टिव मॉडलिंग, डेटा-बेस्ड एक्सपेरिमेंट और क्लाइमेट चेंज एनालिसिस के लिए एआई टूल्स का उपयोग।
- इतिहास और सामाजिक विज्ञान में: डेटा एनालिसिस से ऐतिहासिक पैटर्न पहचान, सेंटिमेंट एनालिसिस और पुराने दस्तावेजों का डिजिटल प्रोसेसिंग।
- हिंदी और भाषा विषयों में: एआई टूल्स से कंटेंट जेनरेशन, भाषा अनुवाद, चैटबॉट डेवलपमेंट और साहित्यिक टेक्स्ट एनालिसिस।
- कम्प्यूटर और आईटी में: एआई, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के एडवांस्ड मॉड्यूल अनिवार्य।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा, “एआई भविष्य की भाषा है, इसे नजरअंदाज करना शिक्षा की हानि होगी।” यह पहल भारत सरकार की नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) से पूरी तरह प्रेरित है, जो डिजिटल इंडिया और स्किल-बेस्ड एजुकेशन पर जोर देती है। गोरखपुर में 500 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों में शिक्षक ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी, ताकि वे एआई टूल्स को प्रभावी ढंग से पढ़ा सकें।
गोरखपुर क्यों बनेगा एआई हब? स्थानीय लाभ
गोरखपुर की भौगोलिक स्थिति, बढ़ती इंडस्ट्रियल ग्रोथ और आईटी पार्क्स इसे एआई हब बनाने के लिए आदर्श बनाते हैं। यहां के स्टार्टअप इकोसिस्टम में एआई, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। पाठ्यक्रम अपग्रेड से छात्रों को लोकल जॉब्स जैसे AI इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, मशीन लर्निंग स्पेशलिस्ट और एआई कंसल्टेंट के अवसर मिलेंगे।
उदाहरण के तौर पर, गोरखपुर के एक सरकारी स्कूल में चल रहे पायलट प्रोजेक्ट में छात्रों ने एआई-बेस्ड ट्रैफिक प्रेडिक्शन मॉडल बनाया, जो 90% सटीक साबित हुआ। इसी तरह कृषि में फसल प्रेडिक्शन, स्वास्थ्य में डायग्नोस्टिक टूल्स और पर्यावरण में प्रदूषण मॉनिटरिंग के लिए एआई ऐप्लिकेशन विकसित होंगे। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस एआई अपग्रेड के लिए 100 करोड़ रुपये का विशेष फंड आवंटित किया है, जिसमें इंफ्रास्ट्रक्चर, लैब्स, सॉफ्टवेयर और ट्रेनिंग शामिल है। इससे गोरखपुर न केवल शिक्षा में, बल्कि इनोवेशन और स्टार्टअप हब के रूप में भी उभरेगा।
गोरखपुर की शिक्षा में एआई का नया दौर
गोरखपुर में एआई क्रांति से शिक्षा का स्तर वैश्विक बराबरी पर पहुंचेगा। छात्र अब सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं,
बल्कि प्रैक्टिकल एआई स्किल्स से लैस होंगे।
NEP 2020 के विजन को साकार करते हुए यह कदम गोरखपुर को उत्तर प्रदेश का पहला एआई-
इनेबल्ड शिक्षा केंद्र बनाएगा। आने वाले सालों में यहां से निकले
छात्र ग्लोबल टेक कंपनियों और लोकल इंडस्ट्री में अहम भूमिका निभाएंगे।
गोरखपुर अब एआई हब बनने की राह पर है – एक ऐसा शहर जहां शिक्षा और तकनीक एक साथ चलेंगी।