अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में
19 साल बाद न्याय की जीत
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में 19 साल पुराने एक दर्दनाक हत्याकांड में आखिरकार न्याय मिल गया है। 2005 में छात्र मुल्ला मोहम्मद साबित अली की हत्या के मामले में तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। यह फैसला लंबे इंतजार के बाद आया है, जिसने AMU समुदाय और पीड़ित परिवार में राहत की लहर दौड़ा दी है। मुल्ला साबित अली उस समय AMU के छात्र थे और हबीब हॉल के सामने ढाबे पर दोस्तों के साथ चाय पी रहे थे, जब हमलावरों ने अचानक फायरिंग कर दी। यह घटना कैंपस में सुरक्षा और छात्र राजनीति से जुड़े विवादों की याद दिलाती है।
घटना का विवरण: हबीब हॉल के सामने हुआ हमला
घटना 2005 की है। मुल्ला मोहम्मद साबित अली, मोहम्मद शाहनवाज खां और निजामुद्दीन तीनों पूर्व छात्र हबीब हॉल के सामने ढाबे पर चाय पी रहे थे। अचानक दो बाइकों पर सवार चार-पांच युवक आए। उन्होंने बिना किसी चेतावनी के ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। एक गोली साबित अली के बाईं तरफ लगी और वह वहीं गिर पड़े। हमलावर मौके से फरार हो गए। साबित अली को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
यह घटना उस समय AMU में काफी सुर्खियां बटोर चुकी थी। छात्र संगठनों और कैंपस राजनीति से जुड़े विवादों को इसका कारण बताया गया था। पुलिस ने जांच शुरू की और तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। केस लंबा चला और कई बार सुनवाई स्थगित होती रही।
19 साल बाद फैसला: तीनों को उम्रकैद
19 साल के लंबे कानूनी संघर्ष के बाद अदालत ने तीन दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने पाया कि हमला सुनियोजित था और इसमें हत्या का इरादा स्पष्ट था। सजा के साथ जुर्माना भी लगाया गया है। पीड़ित परिवार ने इस फैसले को न्याय की जीत बताया है। मुल्ला साबित अली के परिजनों ने कहा कि इतने वर्षों बाद भी सजा मिलना उनके लिए बड़ी राहत है।
AMU प्रशासन और छात्र संगठनों ने भी फैसले का स्वागत किया है। कई पूर्व छात्रों ने
सोशल मीडिया पर लिखा कि यह फैसला कैंपस में कानून का राज स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
केस का महत्व और सबक
यह केस AMU जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में छात्रों की सुरक्षा और
कैंपस विवादों के प्रबंधन की कमी को उजागर करता है।
2005 में हुई यह घटना उस समय छात्र राजनीति में हिंसा के बढ़ते स्तर को दिखाती थी।
लंबी सुनवाई के कारण कई बार न्याय में देरी की आलोचना हुई,
लेकिन अंत में फैसला आने से विश्वास बहाल हुआ है।
परिवार और दोस्तों के लिए यह फैसला देर से सही लेकिन न्यायपूर्ण है। मुल्ला साबित अली की याद में
AMU में कई छात्र अब भी उनकी शहादत को याद करते हैं और कैंपस में शांति की मांग करते हैं।
19 साल बाद मुल्ला मोहम्मद साबित अली हत्याकांड में तीन दोषियों को
उम्रकैद की सजा मिलना एक लंबे इंतजार का अंत है। यह फैसला न केवल पीड़ित परिवार के लिए न्याय है,
बल्कि पूरे AMU समुदाय के लिए यह संदेश है कि अपराध की सजा से बचना मुश्किल है