प्रयागराज माघ मेला 2026
आस्था का महासागर उमड़ा संगम में
प्रयागराज के पवित्र संगम पर आज शुक्रवार को माघ मेला के सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व – वसंत पंचमी स्नान – के अवसर पर लाखों-करोड़ों श्रद्धालु उमड़ पड़े हैं। घने कोहरे और कड़ाके की ठंड को मात देते हुए भक्त त्रिवेणी संगम में डुबकी लगा रहे हैं। सुबह 12 बजे तक आधिकारिक अनुमान के अनुसार लगभग दो करोड़ श्रद्धालु पहले ही आस्था की डुबकी लगा चुके हैं। मेला प्रशासन और पुलिस के अनुसार अगले चार दिनों में कुल साढ़े तीन करोड़ से अधिक भक्तों के संगम पहुंचने की उम्मीद है। यह संख्या माघ मेला की भव्यता और हिंदू धर्म में वसंत पंचमी स्नान के महत्व को दर्शाती है।
वसंत पंचमी स्नान: सबसे बड़ा स्नान पर्व
माघ मेला में वसंत पंचमी का स्नान सबसे बड़ा और सबसे पवित्र स्नान माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था और संगम में स्नान करने से विद्या, बुद्धि और ज्ञान की प्राप्ति होती है। सुबह से ही श्रद्धालु परिवारों के साथ, बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, घाटों पर पहुंच रहे हैं। संगम नोज, अरैल, दर्शन घाट, शास्त्री घाट और अन्य प्रमुख घाटों पर भारी भीड़ देखी जा रही है।
मेला क्षेत्र में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई है। ड्रोन, सीसीटीवी और हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती से श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। घने कोहरे के कारण दृश्यता कम होने पर भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। कई भक्त रात से ही घाटों पर डेरा डाले हुए थे ताकि सबसे पहले स्नान कर सकें।
भीड़ का लाइव अपडेट और प्रशासन की तैयारियां
सुबह 4 बजे से ही स्नान शुरू हो गया था। 8 बजे तक करीब 80 लाख और 12 बजे तक दो करोड़ श्रद्धालु स्नान कर चुके थे। मेला प्रशासन का कहना है कि यह संख्या पिछले वर्षों से काफी अधिक है, जो धार्मिक पर्यटन और आस्था में बढ़ोतरी को दिखाती है।
प्रशासन ने 5,000 से अधिक नावें, 200 से अधिक घाटों पर लाइफगार्ड और मेडिकल टीम तैनात की है। भक्तों के लिए मुफ्त लंगर, पीने का पानी, शौचालय और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। अगले चार दिनों में शनिवार, रविवार और सोमवार को भी बड़ी संख्या में स्नान होने की संभावना है। माघ पूर्णिमा और महाशिवरात्रि स्नान तक मेला चलेगा, लेकिन वसंत पंचमी सबसे बड़ा आकर्षण बना हुआ है।
माघ मेला का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
माघ मेला प्रयागराज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान है। हर साल लाखों-करोड़ों श्रद्धालु यहां गंगा,
यमुना और सरस्वती के संगम में स्नान कर पापों से मुक्ति और पुण्य की कामना करते हैं।
वसंत पंचमी के दिन स्नान करने से सरस्वती माता की कृपा प्राप्त होती है,
जिससे शिक्षा और कला में सफलता मिलती है।
इस वर्ष मेला में अखाड़ों के संतों, नागा बाबाओं और विभिन्न संप्रदायों के साधु-संतों की भी भारी भीड़ है।
संगम घाटों पर कीर्तन, भजन और धार्मिक प्रवचन का माहौल बना हुआ है।
आस्था की डुबकी जारी रहेगी
प्रयागराज का संगम आज आस्था का महासागर बन चुका है। दो करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की डुबकी और
आने वाले दिनों में साढ़े तीन करोड़ का अनुमान माघ मेला की भव्यता को रेखांकित करता है।
घने कोहरे और ठंड के बीच भी भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ।
यह मेला न केवल धार्मिक महत्व रखता है