गोरखपुर विश्वविद्यालय विवाद
गोरखपुर: दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) के भौतिकी विभाग में बुधवार को ब्रह्मांड विज्ञान (कॉस्मोलॉजी) पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया था। मुख्य वक्ता के रूप में प्रसिद्ध विज्ञान संप्रेषक प्रो. शिबेश कुमार जस पैसिफ (Shibesh Kumar Jas Paisif) आमंत्रित थे। लेकिन जैसे ही वक्ता ने अपने विचार साझा करना शुरू किया, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार हंगामा कर दिया। नारेबाजी, विरोध और शोर-शराबे के कारण व्याख्यान बीच में ही स्थगित करना पड़ा। विभाग से वक्ता को बाहर निकालना पड़ा और माहौल तनावपूर्ण हो गया।
व्याख्यान का विषय और विवाद की वजह
व्याख्यान का विषय ‘कॉस्मोलॉजी: ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास’ था, जो भौतिकी के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण था। प्रो. शिबेश जस पैसिफ ने बिग बैंग थ्योरी, ब्लैक होल और आधुनिक खोजों पर बात शुरू की। ABVP कार्यकर्ताओं ने इसे ‘धर्म विरोधी’ या ‘सनातन संस्कृति के विरुद्ध’ बताते हुए विरोध किया। वे नारे लगाने लगे जैसे “भारत माता की जय”, “धर्म की रक्षा” और वक्ता के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां। कार्यकर्ताओं का आरोप था कि व्याख्यान में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हिंदू मान्यताओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
भौतिकी विभाग के अध्यक्ष और आयोजकों ने समझाने की कोशिश की कि यह शुद्ध वैज्ञानिक व्याख्यान है, जिसमें कोई धार्मिक हमला नहीं है। लेकिन हंगामा बढ़ता गया। छात्रों और शिक्षकों ने विरोध जताया कि ABVP ने अकादमिक स्वतंत्रता का हनन किया। विभाग ने वक्ता को सुरक्षित बाहर निकाला और व्याख्यान रद्द कर दिया।
ABVP का पक्ष और विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया
ABVP ने कहा कि वक्ता के विचार ‘राष्ट्र विरोधी’ थे और विश्वविद्यालय में ऐसे व्याख्यान नहीं होने चाहिए। उन्होंने दावा किया कि व्याख्यान में भारतीय प्राचीन विज्ञान को नजरअंदाज किया गया। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे अनुशासनहीनता बताया। कुलपति और प्रॉक्टर ने हंगामे की निंदा की और जांच का आदेश दिया। कुछ छात्र संगठनों ने ABVP पर राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाया।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में पहले भी ABVP से जुड़े विवाद हुए हैं, जैसे फीस वृद्धि या प्रशासनिक मुद्दों पर प्रदर्शन।
यह घटना अकादमिक स्वतंत्रता vs राजनीतिक विचारधारा के टकराव को उजागर करती है।
घटना का प्रभाव और आगे क्या?
इस हंगामे से भौतिकी विभाग के छात्र निराश हैं, क्योंकि महत्वपूर्ण व्याख्यान रुक गया।
विभाग ने कहा कि भविष्य में ऐसे व्याख्यानों के लिए बेहतर सुरक्षा और
पूर्व अनुमति की व्यवस्था की जाएगी। ABVP ने आगे विरोध की चेतावनी दी है।
यह मामला शिक्षा जगत में बहस छेड़ सकता है कि क्या
वैज्ञानिक व्याख्यानों में धार्मिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना चाहिए या अकादमिक स्वतंत्रता सर्वोपरि है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रों और शिक्षकों ने अपील की है कि राजनीतिक संगठन कैंपस में
अकादमिक गतिविधियों में हस्तक्षेप न करें।
यह घटना उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में बढ़ते राजनीतिकरण का उदाहरण है।