उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में वन्यजीवों के मानव बस्तियों में घुसने की घटनाएं बढ़ रही हैं। हाल ही में एक भयावह घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया, जहां एक तेंदुए ने रात के अंधेरे में झोपड़ी में घुसकर 4 वर्षीय मासूम बच्ची पर हमला कर दिया। तेंदुए ने बच्ची का गला दबोचा, जिससे गले पर गहरे घाव आए और खून बहने लगा। परिजनों के शोर मचाने पर तेंदुआ भाग गया, लेकिन बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। यह घटना निचलौल तहसील के मधवलिया रेंज के वनटांगिया गांव में हुई, जहां जंगल से सटी बस्तियां हैं।
घटना का पूरा विवरण
मंगलवार रात करीब 2 बजे यह वारदात घटी। बच्ची शिवानी (4 वर्ष) अपनी मां सोमारी के साथ झोपड़ी में सो रही थी। पिता बिरजू बाहर थे। अचानक तेंदुआ टाट (सैक क्लॉथ) फाड़कर अंदर घुस आया और मां की गोद में सोई बच्ची को गले से पकड़ लिया। बच्ची की चीखें सुनकर मां जागी और चिल्लाने लगी। पिता और पड़ोसी दौड़े आए, जिनके शोर से तेंदुआ डरकर जंगल की ओर भाग गया। बच्ची को तुरंत महाराजगंज जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने गले के गहरे घावों पर इलाज शुरू किया। हालत गंभीर बताई जा रही है, लेकिन जान का खतरा टल गया है।
परिजनों का दर्द और गांव में दहशत
परिजन सदमे में हैं। पिता बिरजू ने बताया, “हम गरीब हैं, झोपड़ी जंगल के किनारे है। रात में डर लगता था, लेकिन ऐसा हमला कभी नहीं सोचा।” गांव में खौफ का माहौल है। लोग रात को बाहर नहीं निकल रहे, महिलाएं और बच्चे विशेष रूप से भयभीत हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से तेंदुए को पकड़कर दूर ले जाने की मांग की। एक ग्रामीण ने कहा, “हर रात डर लगता है, कब कोई और हमला हो जाए।”
वन विभाग की कार्रवाई और विशेषज्ञों की राय
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। डिप्टी रेंजर ने बताया कि तेंदुआ जंगल से भटककर आया लगता है। ट्रैकिंग शुरू कर जाल और कैमरे लगाए गए हैं। सफल होने पर तेंदुए को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ा जाएगा। महाराजगंज में पिछले कुछ महीनों में ऐसी 5 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें हाल ही में एक युवती और किशोरी की मौत भी हुई। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों की कटाई, शिकार की कमी और मानवीय अतिक्रमण से तेंदुए भटक रहे हैं। नेपाल सीमा से सटा यह जिला घने जंगलों वाला है, जहां तेंदुए, बाघ और सांपों के हमले बढ़े हैं। 2025 में ही 12 मामले दर्ज हुए।
बढ़ते वन्यजीव-मानव संघर्ष के कारण और समाधान
महाराजगंज नेपाल बॉर्डर पर है, जहां सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य जैसे क्षेत्र हैं।
जलवायु परिवर्तन और जंगल कटाई से जानवरों का प्राकृतिक आवास सिकुड़ रहा है, जिससे वे गांवों में घुस रहे हैं।
झोपड़ियां जंगलों के किनारे बनी होने से खतरा ज्यादा है।
पर्यावरणविदों ने सरकार से वन्यजीव कॉरिडोर बनाने,
जागरूकता कैंप लगाने और ग्रामीणों को सुरक्षा उपाय सिखाने की मांग की है।
प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने, रात में अकेले न निकलने और बच्चों पर नजर रखने की हिदायत दी है।
यह घटना वन्यजीव संरक्षण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन की जरूरत को रेखांकित करती है।
यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं बढ़ सकती हैं।
महाराजगंज के ग्रामीण अब सुरक्षित नींद की उम्मीद कर रहे हैं।
