लखनऊ: उत्तर प्रदेश में चल रही मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR/SAR) प्रक्रिया में एक बड़ा मामला सामने आया है। बरेली जिले के आंवला क्षेत्र की आनंदी को चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा जारी सामान्य निवास प्रमाण पत्र (Residence Certificate) को SAR फॉर्म में अमान्य घोषित किया गया है। चुनाव आयोग के अनुसार, SAR आवेदन में निवास साबित करने के लिए केवल केंद्र सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त दस्तावेज ही स्वीकार्य हैं, जैसे आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस या गजट नोटिफिकेशन। राज्य स्तर के सामान्य प्रमाण पत्र इस सूची में शामिल नहीं हैं, जिससे आनंदी को 7 दिनों के अंदर वैकल्पिक प्रमाण जमा करने का निर्देश दिया गया है।
SAR/SIR प्रक्रिया क्या है और क्यों सख्ती?
चुनाव आयोग ऑफ इंडिया (ECI) ने 2025-26 में देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) शुरू किया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाना है। यह प्रक्रिया 2026 के विधानसभा चुनावों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार आदि में) से पहले की गई है। SIR के तहत Enumeration Form और Form 6 में निवास, जन्म तिथि और नागरिकता के प्रमाण की सख्त जांच होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में राज्य राजस्व विभाग द्वारा जारी निवास प्रमाण पत्र आम हैं, लेकिन ECI के नियमों के अनुसार ये अपर्याप्त माने जाते हैं। आयोग ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को सर्कुलर जारी कर जांच में कड़ाई बरतने के निर्देश दिए हैं।
बरेली के आंवला क्षेत्र में आनंदी का मामला पहला प्रमुख उदाहरण बन गया है। आनंदी ने SAR फॉर्म में उत्तर प्रदेश सरकार का सामान्य निवास प्रमाण पत्र जमा किया था, लेकिन लखनऊ स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने इसे खारिज कर दिया। आनंदी ने प्रतिक्रिया में कहा कि उनका निवास बरेली में लंबे समय से है और राज्य प्रमाण पत्र वैध होना चाहिए, लेकिन आयोग ने स्पष्ट अस्वीकृति जताई।
मान्य निवास प्रमाण पत्रों की सूची (ECI नियम अनुसार)
चुनाव आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार SAR/SIR में निवास साबित करने के लिए निम्न दस्तावेज स्वीकार्य हैं:
- आधार कार्ड
- पासपोर्ट
- वोटर आईडी (EPIC)
- ड्राइविंग लाइसेंस
- बैंक पासबुक (राष्ट्रीयकृत बैंक)
- बिजली/पानी/गैस बिल (कम से कम 1 वर्ष पुराना)
- स्थायी निवास प्रमाण पत्र (केंद्र/राज्य द्वारा जारी, लेकिन सख्त मानदंड)
- 01.07.1987 से पहले जारी कोई सरकारी दस्तावेज
राज्य सरकारों के सामान्य निवास प्रमाण पत्र (जैसे तहसीलदार द्वारा जारी) को इस प्रक्रिया में मान्य नहीं माना जा रहा, क्योंकि ये आसानी से प्राप्त हो जाते हैं और नागरिकता/निवास की सख्त जांच नहीं करते।
अन्य राज्यों में भी यही समस्या
यह समस्या केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है। बिहार, पश्चिम बंगाल, असम आदि राज्यों में भी कई आवेदकों को इसी कारण नोटिस मिल रहे हैं। SIR 2026 के दौरान लाखों मतदाताओं को नोटिस जारी होने की संभावना है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में जहां राज्य प्रमाण पत्र पर निर्भरता अधिक है। ECI का उद्देश्य अवैध प्रवासियों या डुप्लिकेट एंट्री को रोकना है, जिससे मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित हो।
आनंदी और अन्यों के लिए सलाह
आनंदी जैसे आवेदकों को तुरंत आधार कार्ड, पासपोर्ट या वोटर आईडी जैसे वैकल्पिक दस्तावेज जमा करने चाहिए।
यदि ये उपलब्ध नहीं हैं, तो BLO (Booth Level Officer) से संपर्क कर फील्ड वेरिफिकेशन का विकल्प चुन सकते हैं।
ECI की वेबसाइट voters.eci.gov.in पर SIR स्टेटस चेक करें और आवश्यक दस्तावेज तैयार रखें।
यह मामला सरकारी कर्मचारियों, सेवानिवृत्त अधिकारियों और ग्रामीण निवासियों के लिए चेतावनी है।
समय रहते दस्तावेज सुधारें, वरना मतदाता सूची से नाम कट सकता है।
चुनाव आयोग की यह सख्ती लोकतंत्र की शुद्धता के लिए जरूरी है।