उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (GBU) में कुलसचिव (रजिस्ट्रार) पद को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ. विश्वास त्रिपाठी को पद पर बहाल करने का सख्त आदेश दिया, लेकिन विरोध प्रदर्शन और ड्रामे के कारण वे बिना पद ग्रहण किए ही लौट आए। यह घटना विश्वविद्यालय प्रशासन, कुलपति और स्थानीय संगठनों के बीच गहराते तनाव को उजागर करती है। कोर्ट के फैसले के बाद भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, जिससे शिक्षा जगत में हलचल मची हुई है।
विवाद की पृष्ठभूमि
GBU में कुलसचिव पद का विवाद पिछले कुछ महीनों से चल रहा था। डॉ. विश्वास त्रिपाठी को योग्यता के आधार पर नियुक्त किया गया था, लेकिन लोकायुक्त द्वारा भर्ती और फीस घोटाले की जांच शुरू होने के बाद कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह ने उन्हें 29 दिसंबर 2025 को पद से हटा दिया। विश्वविद्यालय ने दावा किया कि उनका कार्यकाल समाप्त हो गया था, जबकि डॉ. विश्वास ने इसे पूर्वाग्रहपूर्ण और जांच से जुड़ा बताया। इस फैसले के खिलाफ उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।
कोर्ट ने सभी दस्तावेजों की जांच के बाद कुलपति के आदेश को अवैधानिक और पूर्वाग्रहपूर्ण करार दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि डॉ. विश्वास की नियुक्ति प्रक्रिया पारदर्शी थी और कोई ठोस आधार नहीं था। हाईकोर्ट ने तत्काल बहाली का निर्देश दिया, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन पर दबाव बढ़ गया।
ड्रामे की पूरी घटना
हाईकोर्ट के आदेश के बाद डॉ. विश्वास विश्वविद्यालय पहुंचे। सुबह करीब 10 बजे कुलपति कार्यालय में उन्हें ले जाया गया, लेकिन तभी विरोध शुरू हो गया। स्थानीय छात्र संगठन, कर्मचारी यूनियन और कुछ पूर्व कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। नारेबाजी हुई, जैसे “पद न लो, विवाद बढ़ेगा” और “प्रशासन मनमानी बंद करो”। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि बहाली से विश्वविद्यालय में अशांति फैलेगी।
करीब चार घंटे तक हंगामा जारी रहा। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से पद ग्रहण प्रक्रिया टाल दी। डॉ. विश्वास ने स्थिति को देखते हुए पद ग्रहण करने से इनकार कर दिया और घर लौट आए। विश्वविद्यालय ने कहा कि कोर्ट आदेश का पालन किया जाएगा,
लेकिन वर्तमान में सुरक्षा और व्यवस्था के चलते देरी हुई।
यह घटना मीडिया और सोशल मीडिया पर छाई रही, जहां इसे “ड्रामा” कहा गया।
समयरेखा
- दिसंबर 2025: लोकायुक्त ने भर्ती घोटाले की जांच शुरू की, कुलपति ने डॉ. विश्वास को हटाया।
- जनवरी 2026: हाईकोर्ट ने कुलपति के आदेश को निरस्त कर डॉ. विश्वास को बहाल करने का आदेश दिया।
- 21 जनवरी 2026: डॉ. विश्वास पद ग्रहण के लिए पहुंचे, लेकिन विरोध के कारण बिना जॉइनिंग के लौटे।
- कोर्ट ने प्रशासन को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया, लेकिन विरोध जारी।
प्रभाव और महत्व
यह विवाद GBU की छवि पर बुरा असर डाल रहा है। छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों में असमंजस है।
भर्ती और फीस घोटाले की जांच जारी है, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन की
विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। हाईकोर्ट का फैसला कानून की जीत है,
लेकिन विरोध प्रदर्शन से पता चलता है कि राजनीतिक और
स्थानीय दबाव काम कर रहे हैं। यदि स्थिति नहीं सुधरी तो आगे बड़े आंदोलन हो सकते हैं।