किसानों की आय
भारत में गन्ना एक प्रमुख नकदी फसल है, खासकर उत्तर प्रदेश जैसे चीनी उत्पादक राज्यों में। वसंत कालीन गन्ना (फरवरी-मार्च में लगाया जाने वाला) पारंपरिक फसल से 20-25% अधिक उपज देता है। लेकिन चुनौतियां जैसे मिट्टी की उर्वरता घटना और आय में कमी बनी रहती हैं। यहां सह फसली खेती समाधान है, जो गन्ना के साथ अन्य फसलों को एक साथ उगाकर आय को 30% तक बढ़ा सकती है। उत्तर प्रदेश के किसान इस विधि से सालाना 50-70 हजार रुपये अतिरिक्त कमा रहे हैं। विशेष रूप से वसंत कालीन गन्ने में सह फसली अपनाने से प्रति क्विंटल गन्ने पर लगभग 700 रुपये अतिरिक्त आय संभव है, क्योंकि मुख्य फसल की लागत कम होती है और अतिरिक्त फसल से तुरंत कमाई होती है। यह तकनीक किसानों की आय दोगुनी करने में मददगार साबित हो रही है।
सह फसली खेती क्या है?
सह फसली खेती में मुख्य फसल (गन्ना) के साथ छोटी अवधि की फसलें जैसे मूंगफली, चना, उड़द या सरसों उगाई जाती हैं। वसंत गन्ने की 10-12 महीने की अवधि में ये फसलें 60-90 दिनों में तैयार हो जाती हैं। इससे खेत खाली नहीं रहता और मिट्टी का अधिकतम उपयोग होता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह विधि जैविक खेती को बढ़ावा देती है, कीटनाशकों पर निर्भरता कम करती है। उत्तर प्रदेश के लखनऊ, बाराबंकी और सीतापुर जिले में यह सफलतापूर्वक अपनाई जा रही है। हाल के अध्ययनों में देखा गया है कि उड़द या मूंग जैसी दलहनी फसलों की सह फसली से गन्ने की उपज में 10-15% वृद्धि होती है और कुल सिस्टम उत्पादकता 30-35% तक बढ़ जाती है।
वसंत कालीन गन्ना फरवरी-मार्च में बोया जाता है, जब मौसम अनुकूल होता है। सह फसली के लिए पंक्तियों के बीच जगह छोड़कर छोटी फसलें लगाई जाती हैं, जैसे दो पंक्तियों के बीच मूंग, उड़द, लोबिया, भिंडी या सब्जियां। इससे अतिरिक्त आय के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है, क्योंकि दलहनी फसलें नाइट्रोजन फिक्सेशन करती हैं। बिजनौर जिले में हाल ही में 14,463 हेक्टेयर में उड़द-मूंग की सह फसली को बढ़ावा दिया जा रहा है, जहां किसानों को मुफ्त बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
वसंत कालीन गन्ना और सह फसली के लाभ
*वसंत कालीन गन्ना पारंपरिक शरद कालीन से बेहतर उपज देता है क्योंकि यह लंबे समय तक बढ़ता है और बेहतर विकास पाता है। सह फसली से मुख्य फसल की लागत कम होती है, क्योंकि अतिरिक्त फसल से कमाई हो जाती है। उदाहरण के लिए, उड़द की सह फसली से प्रति हेक्टेयर 4-5 क्विंटल अतिरिक्त उत्पादन मिलता है, जिसकी बाजार मूल्य से गन्ने के प्रति क्विंटल प्रभावी आय में 700 रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। उत्तर प्रदेश में किसान मूंगफली, चना या सरसों के साथ यह विधि अपनाकर 50-70 हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त कमा रहे हैं।
यह विधि मिट्टी की सेहत सुधारती है, कीटों को नियंत्रित करती है और पानी-खाद का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह छोटे-मझोले किसानों के लिए आय विविधीकरण का बेहतरीन तरीका है।
हाल के प्रयोगों में देखा गया कि ग्राउंडनट (मूंगफली) की
सह फसली से गन्ने की उपज 10-15% बढ़ी और कुल आय में बड़ा इजाफा हुआ।
चुनौतियां और समाधान
हालांकि सह फसली में प्रबंधन महत्वपूर्ण है, जैसे उचित दूरी और समय पर कटाई।
लेकिन सरकारी योजनाएं जैसे पंचामृत योजना और कृषि विभाग के प्रयास
किसानों को प्रशिक्षण और बीज उपलब्ध करा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में गन्ना विकास विभाग द्वारा
जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जहां उन्नत प्रजातियां और सह फसली को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वसंत कालीन सह फसली खेती गन्ना किसानों के लिए वास्तविक वरदान है।
यह न केवल उपज बढ़ाती है बल्कि अतिरिक्त आय से आर्थिक मजबूती देती है।
उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इस विधि को अपनाकर किसान अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।
कृषि विशेषज्ञों और सरकार के मार्गदर्शन में यह तकनीक अपनाना किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा