उत्तर प्रदेश विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण
SVR 2025 में उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची में बड़ा बदलाव
निर्वाचन आयोग द्वारा कराया गया विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (Special Summary Revision – SVR) 2025 उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को शुद्ध करने का सबसे बड़ा अभियान साबित हुआ। 1 जनवरी 2025 को क्वालिफाइंग डेट के आधार पर तैयार फाइनल लिस्ट में कुल 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए। इसमें मृतक, डुप्लिकेट, स्थायी रूप से स्थानांतरित और फर्जी वोटर शामिल हैं। यह संख्या प्रदेश की कुल मतदाता सूची का लगभग 18-20% है, जो पिछले कई वर्षों में सबसे बड़ा शुद्धिकरण अभियान है।
मुस्लिम बहुल जिलों में सबसे कम नाम कटे
आश्चर्यजनक रूप से, रामपुर, संभल, मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर, सहारनपुर जैसे मुस्लिम बहुल जिलों में नाम कटने की संख्या सबसे कम रही। उदाहरण के लिए:
- रामपुर: केवल 4-5% नाम कटे
- संभल: 5-6% के आसपास
- मुरादाबाद: 6-7%
वहीं, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के हिंदू बहुल जिलों जैसे गोरखपुर, आजमगढ़, बलिया,
देवरिया, मऊ में 25-30% तक नाम हटाए गए। विशेषज्ञों का कहना है
कि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में BLO (बूथ लेवल ऑफिसर) और
राजनीतिक दबाव के कारण शुद्धिकरण अभियान कमजोर रहा।
कुल 2.89 करोड़ नाम क्यों हटे?
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार:
- मृतक मतदाता: लगभग 80 लाख
- डुप्लिकेट नाम: 70 लाख
- स्थायी रूप से बाहर चले गए: 90 लाख
- फर्जी/गलत एंट्री: 39 लाख
यह अभियान आधार लिंकिंग, फॉर्म 7 और फील्ड वेरिफिकेशन पर आधारित था।
आयोग का दावा है कि इससे मतदाता सूची 100% शुद्ध हो गई है,
लेकिन विपक्षी दल इसे एक विशेष समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगा रहे हैं।
राजनीतिक बवाल और आरोप-प्रत्यारोप
समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और AIMIM ने इसे मुस्लिम वोटरों को डिसइनफ्रैंचाइज करने की साजिश बताया है। सपा नेता ने कहा कि मुस्लिम बहुल इलाकों में कम नाम कटना ही साबित करता है कि हिंदू बहुल क्षेत्रों में जानबूझकर ज्यादा नाम काटे गए। वहीं, भाजपा ने इसे पारदर्शी और जरूरी शुद्धिकरण करार दिया है।
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि नाम कटने की प्रक्रिया पूरी तरह नियमों के तहत हुई और किसी भी प्रभावित व्यक्ति को अपील का अधिकार है।
2027 विधानसभा चुनाव पर असर
यह SVR 2025 का सबसे बड़ा प्रभाव 2027 के विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। पूर्वांचल और अवध के कई सीटों पर मतदाता संख्या में भारी कमी आई है, जो सीधे चुनावी समीकरण बदल सकती है। मुस्लिम बहुल सीटों पर मतदाता संख्या लगभग बरकरार रहने से वहां विपक्ष को फायदा मिलने की संभावना है।
मतदाता सूची शुद्धिकरण या राजनीतिक खेल?
SVR 2025 ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची को पूरी तरह बदल दिया है। 2.89 करोड़ नाम हटने से चुनावी नक्शा नया हो गया है। मुस्लिम बहुल इलाकों में कम नाम कटना कई सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना यह है कि 2027 के चुनाव में यह शुद्धिकरण कितना असर डालेगा। निर्वाचन आयोग ने पारदर्शिता का दावा किया है, लेकिन राजनीतिक दलों के बीच बवाल जारी है।