पडरौना निबंधन कार्यालय में बिना PAN के 30 लाख की रजिस्ट्री: IT विभाग का सर्वे शुरू, जांच के दायरे में सैकड़ों डील्स!

उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पडरौना में स्थित निबंधन (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय में बड़ी अनियमितता सामने आई है। आयकर विभाग (IT Department) ने यहां अचानक सर्वे शुरू कर दिया है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि 30 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति रजिस्ट्री बिना PAN कार्ड के की गई हैं। यह नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, क्योंकि आयकर विभाग के अनुसार 10 लाख से अधिक की संपत्ति लेन-देन में PAN अनिवार्य है, जबकि 30 लाख से ऊपर की डील्स में Form 61A के तहत रिपोर्टिंग जरूरी होती है। इस सर्वे से सैकड़ों डील्स जांच के दायरे में आ गई हैं, जिससे टैक्स चोरी और काले धन के मामले उजागर होने की आशंका है। अगर आप “पडरौना रजिस्ट्री PAN violation” या “Kushinagar IT survey property registry” सर्च कर रहे हैं, तो यह ब्लॉग पूरी जानकारी देगा।

क्या है मामला? IT विभाग की जांच क्यों शुरू हुई?

आयकर विभाग ने देशभर में संपत्ति रजिस्ट्री में पारदर्शिता लाने के लिए अभियान तेज किया है। पडरौना सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में टीम ने रिकॉर्ड्स की जांच शुरू की। यहां पाया गया कि कई मामलों में 30 लाख रुपये से अधिक मूल्य की जमीन या प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री बिना खरीदार/विक्रेता के PAN के पूरी की गई। यह Income Tax Act की धारा 285BA के तहत अनिवार्य Form 61A रिपोर्टिंग का उल्लंघन है। विभाग ने रजिस्ट्री के पूरे डेटा की मांग की है, जिसमें 10 लाख से ऊपर की सभी डील्स शामिल हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट्स से पता चला है कि सैकड़ों ऐसी रजिस्ट्री हैं जहां PAN नहीं लिया गया, जो टैक्स चोरी का संकेत देता है।

यह सर्वे धनबाद, आगरा और राजकोट जैसे अन्य जिलों में हुए सर्वे की तर्ज पर है, जहां भी इसी तरह की गड़बड़ियां पाई गईं। पडरौना में यह जांच 2026 की शुरुआत में तेज हुई, क्योंकि हाल के वर्षों में कुशीनगर में रियल एस्टेट ट्रांजेक्शन बढ़े हैं।

PAN कार्ड क्यों अनिवार्य है? नियम क्या कहते हैं?

भारत में संपत्ति रजिस्ट्री के लिए PAN कार्ड अनिवार्य है:

  • 10 लाख रुपये से अधिक की डील में PAN देना जरूरी।
  • 30 लाख रुपये से अधिक की ट्रांजेक्शन में Form 61A के तहत IT विभाग को रिपोर्ट करना पड़ता है।
  • बिना PAN के रजिस्ट्री करने पर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय और पक्षकार दोनों पर पेनल्टी लग सकती है, जिसमें जुर्माना और प्रोसीक्यूशन शामिल है।

यह नियम काले धन पर रोक लगाने, टैक्स चोरी रोकने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।

पडरौना जैसे छोटे शहरों में भी अब सख्ती बढ़ गई है।

जांच के दायरे में क्या-क्या आएगा?

IT विभाग की टीम रजिस्ट्री रिकॉर्ड्स की गहन जांच कर रही है। मुख्य फोकस:

  • बिना PAN वाली 30 लाख+ की सभी डील्स।
  • खरीदार-विक्रेता की पहचान और आय स्रोत।
  • संभावित बेनामी ट्रांजेक्शन।
  • पिछले 2-3 वर्षों की रजिस्ट्री।

विभाग ने 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट मांगी है। अगर उल्लंघन साबित होता है, तो

संबंधित पक्षों पर नोटिस जारी होंगे और टैक्स डिमांड बढ़ सकती है।

क्या प्रभाव पड़ सकता है? आम लोगों के लिए सलाह

यह जांच स्थानीय रियल एस्टेट मार्केट पर असर डालेगी। खरीदारों को अब PAN अनिवार्य रूप से देना होगा,

वरना रजिस्ट्री रुक सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि

इससे काले धन का इस्तेमाल कम होगा और बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी।

सलाह: अगर आप प्रॉपर्टी खरीद/बेच रहे हैं, तो PAN कार्ड तैयार रखें।

30 लाख से अधिक की डील में Form 61A रिपोर्टिंग का ध्यान रखें।

नियमों का पालन न करने पर भारी जुर्माना लग सकता है।