बसपा सुप्रीमो मायावती 70वां जन्मदिन
70वां जन्मदिन: मायावती का राजनीतिक संदेश और ब्राह्मणों को खास अपील
15 जनवरी 2026 को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ स्थित अपने आवास पर अपना 70वां जन्मदिन बड़े ही सादगी और अनुशासन के साथ मनाया। इस अवसर पर पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं और समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ी। मायावती ने पारंपरिक तरीके से जन्मदिन मनाने की बजाय इसे राजनीतिक संदेश देने के मंच के रूप में इस्तेमाल किया।
कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई जब मायावती ने ब्राह्मण समाज को संबोधित करते हुए कहा: “ब्राह्मणों को किसी का चोखा-बाटी नहीं खाना चाहिए। वे सम्मान के पात्र हैं। हम उन्हें पूरा सम्मान देंगे, उनके साथ खड़े रहेंगे और उनकी सुरक्षा व सम्मान सुनिश्चित करेंगे।”
यह बयान यूपी की राजनीति में काफी गूंजा क्योंकि मायावती पिछले कुछ वर्षों से ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश में जुटी हैं। 2007 में ब्राह्मण-दलित गठजोड़ से मिली ऐतिहासिक जीत को दोहराने की उनकी रणनीति 2027 विधानसभा चुनाव से पहले तेज हो गई है।
जन्मदिन समारोह की खास बातें
- जन्मदिन पर कोई केक कटिंग या भव्य आयोजन नहीं हुआ।
- मायावती ने कार्यकर्ताओं से कहा कि जन्मदिन मनाने से बेहतर है कि पार्टी को मजबूत करने में योगदान दें।
- उन्होंने गरीब बच्चों को स्कूल बैग, किताबें और स्टेशनरी वितरित की।
- पार्टी मुख्यालय पर कार्यकर्ताओं ने बड़े-बड़े बैनर लगाए, जिनमें “बहन जी अमर रहें” और “मायावती जी का 70वां जन्मदिन मुबारक” जैसे नारे लिखे गए।
- वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा, राम अचल राजभर, स्वामी प्रसाद मौर्या और अन्य मौजूद रहे।
ब्राह्मण बयान: राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक या पुरानी रणनीति?
मायावती का यह बयान सीधे तौर पर ब्राह्मण समाज को लुभाने का प्रयास माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मणों को किसी भी तरह की अपमानजनक स्थिति में नहीं रखा जाना चाहिए और बसपा उनके लिए सम्मानजनक स्थान सुनिश्चित करेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब:
- योगी सरकार में ब्राह्मण नेताओं की असंतुष्टि बढ़ रही है
- कांग्रेस और सपा भी ब्राह्मण वोट को आकर्षित करने की कोशिश कर रही हैं
- बसपा को 2022 चुनाव में भारी नुकसान हुआ था और ब्राह्मण वोट का बड़ा हिस्सा अन्य दलों की ओर गया
विश्लेषकों का मानना है कि मायावती 2027 में फिर से ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम फॉर्मूला को दोहराना चाहती हैं। “चोखा-बाटी” का जिक्र सामाजिक सम्मान और आत्मसम्मान से जोड़कर उन्होंने ब्राह्मणों के मन को छूने की कोशिश की है।
2027 चुनाव की तैयारी में बसपा का फोकस
मायावती ने जन्मदिन के मौके पर कार्यकर्ताओं से कहा कि पार्टी को संगठनात्मक रूप से मजबूत करना होगा।
उन्होंने आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बसपा की वापसी का भरोसा दिलाया। पार्टी ने हाल ही में
कई जिलों में ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित किए हैं और आगे भी ऐसे कार्यक्रम बढ़ाए जाएंगे।
निष्कर्ष: मायावती की नई रणनीति और यूपी की सियासत
70वां जन्मदिन मायावती के लिए न सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि का मौका था, बल्कि यूपी की बदलती राजनीति में
अपनी जगह मजबूत करने का मंच भी। ब्राह्मणों को दिया गया यह संदेश साफ संकेत देता है
कि बसपा सुप्रीमो पुराने गठजोड़ को फिर से जीवित करने की तैयारी में हैं।
क्या यह बयान ब्राह्मण समाज में असर डालेगा या सिर्फ चुनावी बयानबाजी रहेगा? 2027 तक का समय ही इसका जवाब देगा।
जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं बहन जी! 🇮🇳