ईरान में उबाल: प्रदर्शन हिंसा में बदले, विदेशी साजिश का आरोप
जनवरी 2026 की शुरुआत से ईरान में महंगाई, आर्थिक संकट और शासन विरोधी भावनाओं के कारण बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। ये प्रदर्शन तेजी से हिंसक रूप लेते गए, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुईं। ईरानी सरकार ने इन घटनाओं को “दंगे” और “आतंकवादी गतिविधियां” करार दिया है, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने मौतों की संख्या 500 से अधिक बताई है। कुछ रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 2,000 तक पहुंचने का दावा किया गया है।
ईरानी अधिकारियों का आरोप है कि ये हिंसा अमेरिका और इजराइल की खुफिया एजेंसियों द्वारा भड़काई जा रही है। विशेष रूप से मोसाद (इजराइल की खुफिया एजेंसी) पर बड़ा इल्जाम लगा है। ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उन्होंने 600 मोसाद एजेंट्स की पहचान कर ली है, जो प्रदर्शनों को हिंसक बनाने में शामिल थे।
मोसाद जासूस को मौत की सजा: अली अर्देस्तानी की फांसी
7 जनवरी 2026 को ईरान ने एक व्यक्ति अली अर्देस्तानी को फांसी दे दी, जिस पर मोसाद के लिए जासूसी का आरोप था। ईरानी न्यायपालिका के अनुसार, अर्देस्तानी ने ऑनलाइन मोसाद अधिकारियों से संपर्क किया, संवेदनशील सुरक्षा जानकारी साझा की और बदले में क्रिप्टोकरेंसी तथा ब्रिटेन वीजा का वादा प्राप्त किया। सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को बरकरार रखा, और इसे प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़काने की साजिश से जोड़ा गया।
यह फांसी ईरान-इजराइल के लंबे छद्म युद्ध का हिस्सा मानी जा रही है। ईरानी मीडिया ने इसे “विदेशी साजिश का पर्दाफाश” बताया, जिससे देश में हलचल बढ़ गई।
600 एजेंट्स की पहचान और गिरफ्तारियां
IRGC ने घोषणा की कि उन्होंने देशभर में मोसाद से जुड़े 600 लोगों को चिह्नित किया है। इनमें से कुछ को गिरफ्तार किया गया, और उनके पास हथियार बरामद होने का दावा किया गया। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका और इजराइल ने “आतंकवादियों” को भेजकर मस्जिदों में आग लगवाई और बैंकों पर हमले करवाए। राष्ट्रपति मसूद पेजशकियान ने भी विदेशी ताकतों पर अराजकता फैलाने का आरोप लगाया।
सरकार ने प्रदर्शनकारियों को “मोहारेbeh” (ईश्वर के खिलाफ युद्ध) का दोषी ठहराकर मौत की सजा देने की चेतावनी दी है।
एक 26 वर्षीय प्रदर्शनकारी इरफान सोलतानी को फांसी की सजा सुनाई गई थी,
हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण इसे टाल दिया गया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा कि अगर ईरान हिंसा जारी रखेगा तो
“बहुत मजबूत कार्रवाई” होगी।
इजराइल उच्च सतर्कता पर है, लेकिन सीधे हस्तक्षेप से इनकार कर रहा है।
ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले की धमकी दी है।
मानवाधिकार संगठन जैसे एमनेस्टी इंटरनेशनल और HRANA ने दमन की निंदा की है
और हजारों मौतों की आशंका जताई है।
ईरान ने इंटरनेट ब्लैकआउट और सैटेलाइट जामिंग का सहारा लिया है।
साजिश या आंतरिक असंतोष?
ईरान में यह स्थिति आंतरिक असंतोष और विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों का मिश्रण लगती है।
मोसाद की कथित एंट्री ने तनाव को नया आयाम दिया है।
क्या ये प्रदर्शन शासन परिवर्तन लाएंगे या सख्त दमन से दब जाएंगे? स्थिति तेजी से बदल रही है, और दुनिया की नजरें तेहरान पर टिकी हैं।