गोरखपुर में नशे में धुत
गोरखपुर में शर्मनाक घटना
गोरखपुर शहर में एक बार फिर रेलवे कर्मचारियों की बदतमीजी की घटना ने सुर्खियां बटोरी हैं। मंगलवार रात (13 जनवरी 2026) को नशे की हालत में तीन रेलवे कर्मचारियों ने पहले बीआरडी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हंगामा किया और फिर पुलिस थाने पहुंचकर वहां भी उपद्रव मचाया। यह घटना न केवल रेलवे की छवि को धूमिल कर रही है, बल्कि शहर की कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोगों में आक्रोश है।
घटना का पूरा विवरण
रिपोर्ट्स के अनुसार, तीन रेलवे कर्मचारी (जिनके नाम अभी गोपनीय हैं) रात करीब 10 बजे नशे की हालत में बीआरडी अस्पताल पहुंचे। वे आपस में झगड़ते हुए इमरजेंसी वार्ड में घुसे और डॉक्टरों-नर्सों से बदतमीजी करने लगे। जब डॉक्टरों ने उन्हें शांत होने को कहा तो उन्होंने गाली-गलौज शुरू कर दी और एक डॉक्टर को थप्पड़ मारने की कोशिश की। अस्पताल स्टाफ ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पुलिस पहुंची तो कर्मचारियों ने अस्पताल से भागने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पकड़कर गोरखपुर कैंट थाने ले जाया गया। थाने में भी इनकी गुस्ताखी जारी रही। कर्मचारियों ने वहां ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से तू-तड़ाक किया, कुर्सियां उछालीं और थाने का माहौल खराब करने की कोशिश की। आखिरकार पुलिस ने उन्हें शांत करवाया और मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की।
वीडियो वायरल, लोगों में गुस्सा
घटना के दौरान कई लोगों ने मोबाइल से वीडियो बनाए, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। वीडियो में नशे में धुत कर्मचारी डॉक्टरों से बहस करते और पुलिस पर चिल्लाते दिख रहे हैं। स्थानीय लोग इसे “शर्मनाक” बता रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “रेलवे में नौकरी करने वाले लोग अगर ऐसे व्यवहार करेंगे तो यात्रियों की सुरक्षा कैसे होगी?”
रेलवे और पुलिस की प्रतिक्रिया
रेलवे अधिकारियों ने घटना की जानकारी मिलते ही जांच शुरू कर दी है। गोरखपुर मंडल रेलवे प्रबंधक (DRM) ने बताया कि दोषी कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच और सख्त कार्रवाई की जाएगी। संभावना है कि उन्हें निलंबित किया जा सकता है।
दूसरी तरफ गोरखपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है।
आरोपों में धारा 323 (मारपीट), 504 (जानबूझकर अपमान), 506 (धमकी) और 353 (सरकारी कार्य में बाधा) शामिल हैं।
पुलिस ने कहा कि नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर उपद्रव करने के लिए सख्त सजा दी जाएगी।
समाज पर प्रभाव और सबक
यह घटना एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों में नशे की समस्या को उजागर करती है।
रेलवे जैसे महत्वपूर्ण विभाग में काम करने वाले लोग अगर खुद अनुशासनहीन होंगे,
तो समाज में कानून का पालन कैसे होगा? स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि रेलवे में नशा विरोधी जांच और काउंसलिंग सत्र अनिवार्य किए जाएं।
निष्कर्ष
गोरखपुर में नशे में धुत रेलवे कर्मचारियों द्वारा अस्पताल और थाने में किया गया हंगामा निंदनीय है।
यह घटना न केवल व्यक्तिगत अनुशासन की कमी दिखाती है, बल्कि संस्थागत जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाती है।
उम्मीद है कि रेलवे और पुलिस दोनों स्तरों पर सख्त कार्रवाई होगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
गोरखपुरवासियों को अब शांति और सम्मानजनक व्यवहार की उम्मीद है।
कानून सबके लिए बराबर – कोई भी अपराधी बचेगा नहीं!