काठमांडू की सड़कें गूंज रही हैं
जनवरी 2026 में नेपाल की राजधानी काठमांडू की सड़कें एक बार फिर उबाल पर हैं। हजारों प्रदर्शनकारी “राजा लो नेपाल बचाओ” (राजा लाओ, नेपाल बचाओ) के नारे लगा रहे हैं। यह आंदोलन राजशाही की बहाली की मांग को लेकर तेजी से फैल रहा है, जिसमें पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र शाह के समर्थक सबसे आगे दिख रहे हैं। नेपाल पुलिस ने कई जगहों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों का जोश कम होने का नाम नहीं ले रहा।
यह आंदोलन पिछले कुछ महीनों से धीरे-धीरे बढ़ रहा था, लेकिन जनवरी 2026 में यह अपने चरम पर पहुंच गया है।
नेपाल में राजशाही बहाली की मांग क्यों उभरी? मुख्य कारण
नेपाल में 2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद से लोकतंत्र और गणतंत्र की स्थापना हुई, लेकिन पिछले 15-16 वर्षों में राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और आर्थिक संकट ने लोगों का गुस्सा बढ़ाया है। प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
- बार-बार सरकार गिरना और राजनीतिक अस्थिरता 2008 के बाद नेपाल में 13 प्रधानमंत्री बदल चुके हैं। 2025-26 में भी सरकार अस्थिर बनी हुई है। लोग कहते हैं कि गणतंत्र ने सिर्फ नेताओं को फायदा पहुंचाया, आम नागरिक को नहीं।
- बेरोजगारी और आर्थिक संकट युवा वर्ग में बेरोजगारी चरम पर है। महंगाई, ईंधन संकट और रेमिटेंस पर निर्भर अर्थव्यवस्था से लोग त्रस्त हैं। कई लोग मानते हैं कि राजशाही के समय स्थिरता ज्यादा थी।
- भ्रष्टाचार का बोलबाला बड़े नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहते हैं। अखबारों और सोशल मीडिया पर भ्रष्टाचार की खबरें आम हैं, जिससे लोगों का गणतंत्र पर भरोसा कम हुआ है।
- हिंदू राष्ट्र की मांग 2008 में नेपाल को धर्मनिरपेक्ष घोषित किया गया था।
- हिंदू बहुल देश में कई लोग इसे गलत मानते हैं।
- राजशाही बहाली के साथ हिंदू राष्ट्र की मांग भी जोर पकड़ रही है।
- पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र की बढ़ती लोकप्रियता ज्ञानेन्द्र शाह पिछले कुछ सालों में चुप रहे,
- लेकिन 2025 से उन्होंने लोगों से मिलना-जुलना शुरू किया।
- उनके समर्थक उन्हें “राष्ट्रवादी” और “स्थिरता का प्रतीक” बताते हैं।
आंदोलन की वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026)
- प्रदर्शनकारी – मुख्य रूप से युवा, हिंदू संगठन, राष्ट्रवादी दल और पूर्व राजशाही समर्थक
- मांगें – संवैधानिक राजशाही की बहाली, हिंदू राष्ट्र घोषणा, वर्तमान सरकार का इस्तीफा
- सरकार की प्रतिक्रिया – कर्फ्यू, इंटरनेट ब्लैकआउट के प्रयास, लेकिन सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो रहे हैं
- अंतरराष्ट्रीय नजर – भारत और चीन दोनों ही स्थिति पर नजर रखे हुए हैं
क्या राजशाही वापस आ सकती है?
विशेषज्ञों का मानना है कि पूर्ण राजशाही की वापसी मुश्किल है,
लेकिन संवैधानिक राजशाही (जैसे ब्रिटेन या जापान में) की बहाली पर चर्चा तेज हो सकती है।
यदि राजनीतिक दल आपसी मतभेद नहीं सुलझाते, तो आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।
निष्कर्ष
नेपाल में “राजा लो नेपाल बचाओ” का नारा अब सिर्फ नारा नहीं रहा,
बल्कि गहरी असंतुष्टि और राजनीतिक संकट का प्रतीक बन चुका है।
गणतंत्र को स्थिरता और विकास देने में असफल होने का आरोप लग रहा है।
आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाता है, यह नेपाल की राजनीति के भविष्य को तय करेगा।