हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते अत्याचार
जनवरी 2026 की शुरुआत में पड़ोसी देश बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों ने भारत में राजनीतिक बहस छेड़ दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश में कट्टरपंथी तत्वों द्वारा हिंदू मंदिरों पर हमले, संपत्ति लूट और हत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसे ‘हिंदू नरसंहार’ की संज्ञा दी जा रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है, जबकि विपक्षी दल कांग्रेस, सपा, बसपा आदि पूरी तरह खामोश हैं।
योगी ने एक जनसभा में कहा, “पड़ोसी देश में हमारे हिंदू भाइयों पर हो रहे अत्याचारों पर विपक्ष की चुप्पी शर्मनाक है। यह मानवाधिकार का उल्लंघन है और भारत सरकार को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और समर्थकों द्वारा सराहा जा रहा है।
बांग्लादेश में क्या हो रहा है?
बांग्लादेश में 2025 के अंत से ही राजनीतिक अस्थिरता बढ़ी है। शेख हसीना सरकार के बाद अंतरिम सरकार के दौरान कट्टरपंथी संगठनों का प्रभाव बढ़ा, जिससे अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय निशाने पर आ गया। ह्यूमन राइट्स वॉच और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्ट्स में दर्ज है कि पिछले 6 महीनों में 50 से अधिक हिंदू मंदिरों पर हमले हुए, सैकड़ों परिवार विस्थापित हुए और दर्जनों हत्याएं हुईं।
यह नरसंहार न केवल धार्मिक है बल्कि राजनीतिक भी, जहां हिंदुओं को ‘भारतीय एजेंट’ बताकर निशाना बनाया जा रहा है। भारत के साथ सीमा पर बढ़ते तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। योगी आदित्यनाथ ने इसे ‘संगठित नरसंहार’ करार दिया और कहा कि यह 1971 के मुक्ति संग्राम की याद दिलाता है, जब भारत ने बांग्लादेश की मदद की थी।
विपक्ष की खामोशी: राजनीतिक साजिश या डर?
विपक्षी दलों की चुप्पी पर योगी ने सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, “जब भारत में कोई छोटी घटना होती है तो विपक्ष शोर मचाता है, लेकिन पड़ोसी देश में हिंदुओं का खून बह रहा है और वे खामोश हैं। यह उनकी सेकुलरिज्म की पोल खोलता है।” कांग्रेस नेता राहुल गांधी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा की मायावती ने अब तक कोई बयान नहीं दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष की यह चुप्पी मुस्लिम वोट बैंक को नाराज न करने की रणनीति है। 2024 लोकसभा चुनावों में विपक्ष को मुस्लिम समुदाय से समर्थन मिला था, इसलिए वे संवेदनशील मुद्दों पर बोलने से कतरा रहे हैं।
*योगी ने इसे ‘वोट बैंक पॉलिटिक्स’ करार दिया और कहा कि हिंदू एकता ही इसका जवाब है।
योगी का मोर्चा: क्या होंगे कदम?
योगी आदित्यनाथ ने न केवल विपक्ष पर निशाना साधा बल्कि
केंद्र सरकार से मांग की कि बांग्लादेश पर दबाव बनाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया:
- भारत बांग्लादेश को दी जाने वाली आर्थिक मदद रोके।
- सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई जाए और पीड़ित हिंदुओं को शरण दी जाए।
- अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे UN पर मुद्दा उठाया जाए।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने पहले भी CAA-NRC जैसे कदम उठाए थे, जो अल्पसंख्यक सुरक्षा से जुड़े थे।
इस बयान से बीजेपी कार्यकर्ताओं में जोश है और सोशल मीडिया पर #SaveBangladeshHindus ट्रेंड कर रहा है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं और भारत की भूमिका
अमेरिका, यूरोपीय संघ और UN ने बांग्लादेश की स्थिति पर चिंता जताई है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है।
योगी के बयान से यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उभरा है, जो 2027 चुनावों में असर डाल सकता है।
निष्कर्ष: एकता की जरूरत
पड़ोसी देश में हिंदू नरसंहार पर विपक्ष की खामोशी और योगी का मोर्चा राजनीति के दो चेहरे दिखाता है।
यह समय है जब सभी दल मिलकर मानवाधिकार की रक्षा करें। योगी का स्टैंड हिंदू समुदाय को मजबूत करेगा,
लेकिन असली जीत तब होगी जब अंतरराष्ट्रीय दबाव से अत्याचार रुकें।