माघ मेला 2026
प्रयागराज: संसार का मोह-माया त्यागकर संन्यास धारण करने वाले साधु-संत भी आज के दौर में खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। माघ मेला 2026 में संगम तट पर आए हजारों बाबाओं में से 150 से अधिक ने जान का खतरा बताते हुए मेला पुलिस से गनर उपलब्ध कराने की लिखित मांग की है। मेला प्रशासन ने गंभीरता से लिया और अब तक करीब 90 साधु-संतों को गनर प्रदान कर दिए गए हैं। यह संख्या पिछले वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
क्यों मांग रहे हैं साधु-संत गनर?
माघ मेला में हर साल लाखों श्रद्धालु और हजारों संत-साधु संगम स्नान और कल्पवास के लिए आते हैं। इस बार 14 जनवरी से शुरू होने वाले मेले में सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात है। फिर भी कई बड़े अखाड़ों और प्रमुख संतों ने थ्रेट की आशंका जताई है।
सूत्रों के अनुसार, मांग करने वालों में निरंजनी, जूना, महानिर्वाणी जैसे प्रमुख अखाड़ों के महंत और कई स्वतंत्र संत शामिल हैं। कुछ ने पुराने विवाद, जमीन या संपत्ति से जुड़े झगड़े का हवाला दिया, तो कुछ ने सामान्य सुरक्षा चिंता बताई। एसपी मेला राजेश द्विवेदी को सौंपे गए पत्रों में संतों ने लिखा है कि मेले में भीड़ और अज्ञात लोगों के बीच खतरा ज्यादा है।
पुलिस की जांच और गनर आवंटन प्रक्रिया
मेला पुलिस ने सभी आवेदनों को गंभीरता से लिया। एसपी मेला ने बताया कि हर आवेदन की गहन जांच की जा रही है। लोकल इंटेलिजेंस, थाना पुलिस और आईबी से थ्रेट एनालिसिस कराया जा रहा है।
- अब तक प्राप्त 150 से ज्यादा आवेदनों में से करीब 90 को स्वीकृति मिल चुकी है।
- इनमें प्रमुख अखाड़ों के शीर्ष महंत, महिला संत और कुछ विवादास्पद बैकग्राउंड वाले बाबा शामिल हैं।
- हर गनर के साथ एक-दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जा रहे हैं।
- बाकी आवेदनों की जांच जारी है और जरूरत पड़ने पर और गनर दिए जाएंगे।
पिछले वर्षों में भी कुछ प्रमुख संतों को गनर मिलते थे, लेकिन इस बार संख्या रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह स्थिति मेले की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रही है। एक तरफ संतों का कहना है कि मेले में चोरी, छिनतैती और पुराने विवादों के कारण खतरा रहता है। दूसरी तरफ विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ संत अनावश्यक रूप से गनर मांग रहे हैं, जिससे पुलिस बल का दुरुपयोग हो रहा है।
मेला क्षेत्र में 10,000 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं। सीसीटीवी, ड्रोन और एआई बेस्ड सर्विलांस सिस्टम लगाए गए हैं।
फिर भी संतों की यह मांग बताती है कि ग्राउंड लेवल पर अभी भी कमियां हैं।
माघ मेला 2026 की तैयारियां
इस बार माघ मेला को कुंभ की तर्ज पर भव्य बनाने की तैयारी है।
संगम क्षेत्र में 12 सेक्टर बनाए गए हैं।
मुख्य स्नान 14 जनवरी (मकर संक्रांति), 29 जनवरी (मौनी अमावस्या) और 12 फरवरी (बसंत पंचमी) को होंगे।
मेले में करीब 5 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है।
प्रशासन ने संतों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। प्रमुख अखाड़ों के शिविरों में अतिरिक्त फोर्स तैनात की गई है।
महिला संतों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
सुरक्षा और आस्था का संतुलन
माघ मेला आस्था का महापर्व है, लेकिन संतों की बढ़ती सुरक्षा मांग आज के सामाजिक माहौल को भी दर्शाती है।
प्रशासन का प्रयास है कि कोई अप्रिय घटना न हो और मेला शांतिपूर्ण संपन्न हो।
संतों को सुरक्षा देना जरूरी है, लेकिन सही थ्रेट एनालिसिस के साथ।
उम्मीद है कि माघ मेला 2026 सुरक्षित और भव्य रहेगा।
