गोरखपुर। सर्द हवाओं ने जैसे ही उत्तर भारत में दस्तक दी, गोरखपुर का प्राकृतिक सौंदर्य और बढ़ गया। रामगढ़ ताल और गोरखपुर चिड़ियाघर के वेटलैंड क्षेत्र में इन दिनों विदेशी पक्षियों की चहचहाहट से नजारा मनमोहक बन गया है। एशिया के कई देशों और हिमालय क्षेत्र से आने वाले ये परिंदे गोरक्षनगरी की आबोहवा में रच-बस गए हैं।
वेटलैंड बना विदेशी परिंदों का नया ठिकाना
रामगढ़ ताल के किनारे बसे वेटलैंड इलाकों में इन दिनों दर्जनों प्रजातियों के पक्षियों का जमावड़ा लगा है। स्थानीय बर्ड वॉचर्स और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार इस साल लगभग 70 से अधिक विदेशी पक्षियों का आगमन रिकॉर्ड किया गया है। इनमें ग्रे हेरॉन, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड और कॉमन टील जैसी प्रजातियां प्रमुख हैं। ये पक्षी साइबेरिया, मंगोलिया और हिमालय से माइग्रेट कर यहां पहुंचते हैं।

हिमालयी पक्षियों को रास आई गोरखपुर की ठंड
हिमालय क्षेत्र से आने वाले कई पक्षी अब नियमित रूप से गोरखपुर का रुख करने लगे हैं। यहां का संतुलित तापमान और साफ जल स्रोत उनके लिए अनुकूल माहौल प्रदान कर रहा है। जीवविज्ञानी मानते हैं कि गोरखपुर की पारिस्थितिकी विविधता इन परिंदों के लिए आदर्श होती जा रही है, जिससे हर साल विदेशी पक्षियों की संख्या बढ़ रही है। ठंड में ये पक्षी भोजन और आराम के लिए वेटलैंड चुनते हैं।
पर्यटन को मिला नया आयाम
इन विदेशी पक्षियों ने गोरखपुर पर्यटन में नई जान फूंक दी है। सुबह-सुबह जब सूरज की किरणें रामगढ़ झील के पानी पर पड़ती हैं और पक्षियों का झुंड उड़ान भरता है, तो दृश्य देखने लायक होता है।
पर्यटक, फोटोग्राफर और नेचर प्रेमी बड़ी संख्या में यहां पहुंच रहे हैं।
शहर के होटल और गाइड सेवाओं की भी मांग बढ़ रही है। बर्ड वॉचिंग टूर आयोजित हो रहे हैं।
रामगढ़ ताल अब बर्डर्स का हॉटस्पॉट बन गया है।
यह नजारा गोरखपुर की प्राकृतिक संपदा को दर्शाता है। वेटलैंड संरक्षण से पक्षी आकर्षित हो रहे हैं।
पर्यावरण प्रेमी इसे अच्छा संकेत मानते हैं। ठंड में ये परिंदे शहर को जीवंत बना रहे हैं।
गोरखपुर में पक्षी प्रेमियों के लिए यह समय स्वर्णिम है।
विदेशी परिंदों की चहचहाहट सुनें और प्रकृति का आनंद लें। रामगढ़ ताल विजिट करें।
यह मौसम बर्ड वॉचिंग का बेस्ट टाइम है।
कैमरा लेकर जाएं और यादें कैद करें। गोरखपुर की यह खूबसूरती देखने लायक है।
