उत्तर प्रदेश में पानी की उपलब्धता और सिंचाई की समस्या को दूर करने के लिए राज्य सरकार अब मिशन मोड पर काम कर रही है। वेस्ट यूपी से लेकर पूर्वांचल तक फैले करीब तीन दर्जन जिलों को तीन नई और बड़ी सिंचाई परियोजनाओं से सीधा लाभ मिलने जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद प्रदेश की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से न केवल खेती की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी।
तीन बड़ी सिंचाई परियोजनाएं: परिवर्तन की आधारशिला
राज्य सरकार जिन तीन प्रमुख परियोजनाओं पर काम कर रही है, उनमें ईस्टर्न यूपी रिवर लिंक प्रोजेक्ट, गंगा एक्सटेंशन नहर योजना और कानपुर-बुंदेलखंड सिंचाई गलियारा शामिल हैं। इनका मकसद है — यमुना, गंगा और घाघरा नदियों के स्रोतों से जल का पुनर्वितरण कर कम वर्षा वाले इलाकों तक पहुँचना।

ईस्टर्न यूपी रिवर लिंक प्रोजेक्ट पूर्वांचल के सूखाग्रस्त जिलों को लक्ष्य बनाएगा। गंगा एक्सटेंशन नहर से मध्य यूपी के जिलों में नहरों का विस्तार होगा। कानपुर-बुंदेलखंड गलियारा बुंदेलखंड के पानी की कमी वाले क्षेत्रों को राहत देगा। ये परियोजनाएं पश्चिम से पूर्व तक समृद्धि की धारा बहाएंगी।
लाभ: कृषि और अर्थव्यवस्था मजबूत
इन परियोजनाओं से 30 से अधिक जिलों में लाखों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी।
रबी और खरीफ फसलें बढ़ेंगी। किसानों की आय दोगुनी होगी। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ेगा।
जल संरक्षण और भूजल स्तर सुधार होगा। सूखे की मार कम होगी।
सरकार का लक्ष्य आत्मनिर्भर कृषि है। ये योजनाएं डबल इंजन सरकार की प्रतिबद्धता दिखाती हैं।
पूर्वांचल और बुंदेलखंड जैसे पिछड़े क्षेत्रों को विशेष फायदा मिलेगा।

कार्य प्रगति: मिशन मोड
परियोजनाएं मिशन मोड पर चल रही हैं। सर्वे, डिजाइन और निर्माण तेज है।
केंद्र और राज्य का सहयोग है। बजट आवंटन बढ़ाया गया है। समय पर पूरा करने का लक्ष्य है।
यह पहल यूपी को कृषि हब बनाएगी। समृद्धि की धारा बहेगी। किसान खुशहाल होंगे।
यूपी में सिंचाई क्रांति की शुरुआत है। पश्चिम से पूर्व तक विकास पहुंचेगा। सरकार की यह योजना सराहनीय है।