उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की जमानत अर्जी पर हाल ही में कोर्ट में सुनवाई टल गई है, जबकि वे देवरिया जेल में अनशन पर बैठे हैं। उनकी मुख्य मांग गिरफ्तारी के समय का सीसीटीवी फुटेज और सीडीआर उपलब्ध कराना है। यह मामला राजनीतिक विवादों से घिरा हुआ है, जो यूपी की राजनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है।
अमिताभ ठाकुर का बैकग्राउंड
अमिताभ ठाकुर 1992 बैच के पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं, जो देवरिया के एसपी रह चुके हैं। वे आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और सामाजिक-राजनीतिक मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं। 2021 में जबरन रिटायरमेंट के बाद वे राजनीतिक टिप्पणियां करते रहे, जिससे कई विवाद हुए।
गिरफ्तारी का कारण
अमिताभ ठाकुर को 1999 के एक जमीन धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि उन्होंने देवरिया एसपी के पद का दुरुपयोग कर पत्नी नूतन ठाकुर के नाम से फर्जी दस्तावेजों से इंडस्ट्रियल प्लॉट हासिल किया। लखनऊ के तालकटोरा थाने में सितंबर 2025 में मुकदमा दर्ज हुआ, और 8-10 दिसंबर 2025 को शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर देवरिया जेल भेजा गया।
जमानत अर्जी पर सुनवाई टलने की वजहें
देवरिया सीजेएम कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल हुई, लेकिन शोक के कारण 14 दिसंबर 2025 को टली। बाद में कागज अधूरे होने से खारिज, फिर सत्र न्यायालय वाराणसी में नई अर्जी, जो 2 जनवरी 2026 को बनारस बार चुनाव के कारण टली और 5 जनवरी तय हुई। कोर्ट ने विवेचक को दस्तावेजों के साथ तलब किया है।
जेल में अनशन की शुरुआत
ठाकुर 1 जनवरी 2026 (गुरुवार शाम) से देवरिया जेल में आमरण अनशन पर हैं। अनशन का कारण गिरफ्तारी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी बताते हुए पुलिस पर साक्ष्य मिटाने का आरोप लगाया। उन्होंने सीजेएम कोर्ट के बाहर पत्रकारों को बताया कि जब तक मांगें पूरी न हों, अनशन जारी रहेगा।
अनशन की मुख्य मांगें
शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तारी के समय का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराना।
सदर कोतवाली में रखे जाने के दौरान का डिजिटल वीडियो रिकॉर्डिंग।
गिरफ्तारी से कोर्ट पेशी तक का कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर)।
पुलिसकर्मियों द्वारा कथित दुर्व्यवहार के साक्ष्य संरक्षित करना।
कोर्ट की प्रतिक्रिया और अगली सुनवाई
कोर्ट ने जमानत पर बहस सुनी, लेकिन मामले की गंभीरता पर विवेचक को सभी कागजात लाने को कहा।
अगली सुनवाई शनिवार या 5 जनवरी 2026 को निर्धारित है।
ठाकुर ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को पत्र लिखा है।
राजनीतिक प्रभाव
यह मामला यूपी राजनीति में गरमा रहा है, क्योंकि ठाकुर योगी सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं।
जेल में मिलने वालों की संख्या बढ़ी है, और अनशन से प्रशासन में हड़कंप।
पूर्व आईपीएस का यह संघर्ष न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठा रहा है।
यह मामला न्याय और पारदर्शिता की मांग कर रहा है।