गिग वर्कर्स की हड़ताल
आज देशभर में गिग वर्कर्स की हड़ताल ने ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं को पूरी तरह ठप कर दिया है। Zomato, Swiggy, Blinkit, Zepto और अन्य प्लेटफॉर्म्स की 10 मिनट डिलीवरी का दावा अब सिर्फ सपना लग रहा है। राइडर्स ने एकजुट होकर कहा – “काम के बराबर वेतन नहीं मिल रहा, बोनस और इंसेंटिव खत्म हो गए, हमारी मेहनत का कोई मूल्य नहीं।” यह हड़ताल 31 दिसंबर 2025 से शुरू हुई और लाखों राइडर्स ने काम बंद कर दिया।
हड़ताल का मुख्य कारण: कम वेतन और शोषण
राइडर्स की प्रमुख मांगें:
- न्यूनतम वेतन की गारंटी।
- प्रति डिलीवरी फिक्स्ड रेट।
- बोनस और इंसेंटिव बहाल।
- बीमा और स्वास्थ्य सुविधा।
- 10 मिनट डिलीवरी का दबाव खत्म।
- लंबे घंटे काम पर रोक।
- पेट्रोल और मेंटेनेंस खर्च में मदद।
राइडर्स कह रहे हैं कि पहले 10-12 डिलीवरी से 800-1000 रुपये कमाई होती थी, लेकिन अब 18-20 डिलीवरी से भी 500 रुपये मुश्किल से मिलते हैं। प्लेटफॉर्म कंपनियां हर महीने नियम बदलती हैं, जिससे आय घटती जा रही है।
हड़ताल का असर: 10 मिनट डिलीवरी ठप
हड़ताल के कारण:
- ऑर्डर कैंसिल हो रहे।
- डिलीवरी समय 1 घंटे से ज्यादा।
- ग्राहक परेशान।
- रेस्तरां और दुकानें प्रभावित।
- कंपनियों को लाखों का नुकसान।
- सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल।
- ग्राहकों का समर्थन।
ग्राहक कह रहे हैं – “राइडर्स की मांग जायज है।”
राइडर्स की आवाज: “काम के बराबर वेतन दो”
राइडर्स ने एकजुट होकर कहा:
- हम दिन-रात काम करते हैं।
- बारिश-धूप में डिलीवरी।
- कोई बीमा नहीं।
- परिवार का पालन-पोषण।
- कंपनियां मुनाफा कमा रही।
- हमारी मेहनत का कोई मूल्य नहीं।
- हड़ताल जारी रहेगी।
*राइडर्स का गुस्सा साफ दिख रहा है।
कंपनियों का जवाब: बातचीत का आश्वासन
Zomato-Swiggy ने कहा:
- राइडर्स से बातचीत होगी।
- मांगों पर विचार।
- हड़ताल से नुकसान।
- ग्राहकों से माफी।
- वैकल्पिक व्यवस्था।
- जल्द समाधान।
कंपनियां दबाव में।
सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव: हड़ताल का असर
हड़ताल से:
- गिग वर्कर्स एकजुट।
- श्रम कानून पर बहस।
- विपक्ष समर्थन।
- सरकार पर दबाव।
- सोशल मीडिया ट्रेंड।
- ग्राहक जागरूक।
- राइडर्स हक।
हड़ताल राष्ट्रीय मुद्दा बन गई।
