प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा में मनरेगा को रिप्लेस करने वाले VB-G RAM G बिल पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने मनरेगा योजना को ग्रामीण भारत की रीढ़ बताते हुए नए विधेयक को मजदूर विरोधी करार दिया। यह भाषण शीतकालीन सत्र 2025 में दिया गया, जहां उन्होंने कांग्रेस की ओर से पुरजोर विरोध दर्ज किया।
मनरेगा पर प्रियंका का जोर: ग्रामीण भारत की जीवनरेखा
प्रियंका ने मनरेगा की महत्वता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजना ने करोड़ों मजदूरों को रोजगार दिया है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। लेकिन सरकार की नीतियां इसे खत्म कर रही हैं। प्रियंका ने उदाहरण दिए कि फंड देरी से आते हैं और डिजिटल e-KYC से गरीब प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि VB-G RAM G बिल से मनरेगा की गारंटी खत्म हो जाएगी और मजदूरों को निजी सेक्टर पर निर्भर होना पड़ेगा।
VB-G RAM G बिल पर तीखा प्रहार: कॉरपोरेट साजिश का आरोप
प्रियंका ने बिल पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह बिल नाम से ग्राम विकास का है, लेकिन असल में कॉरपोरेट के लिए है। प्रियंका ने कहा, “यह बिल ग्रामीण भारत को बेचने की साजिश है। मनरेगा की जगह निजी कंपनियां आएंगी, जो मजदूरों का शोषण करेंगी।” उन्होंने सरकार से बिल वापस लेने की मांग की।
विपक्षी एकता का संदेश: कांग्रेस की रणनीति
भाषण में प्रियंका ने विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि मनरेगा बचाना सभी की जिम्मेदारी है। यह भाषण कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा लग रहा है, जहां ग्रामीण मुद्दों को उठाकर 2029 चुनाव की तैयारी हो रही है। प्रियंका ने कहा कि जनता सरकार की पोल खोल देगी।
प्रियंका गांधी ने उजागर किया कि मनरेगा में 90% फंड केंद्र देता था,
लेकिन नए बिल में राज्य 60% वहन करेंगे।
मजदूरी बढ़ोतरी का कोई प्रावधान नहीं, जबकि रोजगार के दिन बढ़ाने का दावा खोखला है।
यह राज्यों पर बोझ डालेगा और योजना को समाप्त कर देगा
ग्रामसभाओं की भूमिका कमजोर
राजनीतिक प्रभाव: सरकार पर दबाव
यह भाषण से सरकार पर दबाव बढ़ा है। विपक्ष ने समर्थन किया और बिल पर बहस की मांग की।
सोशल मीडिया पर प्रियंका का भाषण वायरल हो रहा है और लोग सराहना कर रहे हैं।
सरकार ने कहा कि बिल ग्राम विकास के लिए है और आरोप निराधार हैं।
जनता की प्रतिक्रिया: समर्थन और बहस
जनता में प्रतिक्रिया सकारात्मक है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रियंका की आवाज गूंज रही है।
मजदूर संगठन समर्थन दे रहे हैं। बहस छिड़ गई है कि बिल से मनरेगा प्रभावित होगा या नहीं।