राम मंदिर से मायावती के कमबैक तक
वर्ष 2025 उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए बेहद उथल-पुथल भरा रहा। राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की गूंज से लेकर मायावती के राजनीतिक कमबैक तक, विवाद, बगावत और डैमेज कंट्रोल ने पूरे साल सुर्खियां बटोरीं। यह साल भाजपा की मजबूती, विपक्ष की बिखराव और नए गठजोड़ की कोशिशों का गवाह बना।
राम मंदिर की गूंज: भाजपा का बड़ा कार्ड
साल की शुरुआत राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ से हुई। भाजपा ने इसे बड़ा राजनीतिक हथियार बनाया और हिंदू वोट बैंक को एकजुट करने में सफल रही। सीएम योगी ने कई कार्यक्रम आयोजित किए, जिससे पार्टी की छवि मजबूत हुई। लेकिन विपक्ष ने इसे राजनीतिकरण बताया।
मायावती का कमबैक: दलित वोट बैंक पर फोकस
मायावती ने साल के मध्य में सक्रियता बढ़ाई और दलित वोट बैंक को साधने की कोशिश की। बसपा की रैलियां और बयान सुर्खियां बने। मायावती ने भाजपा और सपा पर हमला बोला और खुद को दलितों की असली आवाज बताया। उनका कमबैक 2027 चुनाव की तैयारी माना जा रहा है।
विवादों का दौर: बगावत और आरोप
भाजपा में कुछ नेताओं की बगावत और टिकट वितरण पर विवाद रहे। कई पुराने नेता नाराज दिखे। विपक्ष में सपा और कांग्रेस के गठजोड़ की कोशिशें नाकाम रहीं। आरक्षण, जातिगत जनगणना और बेरोजगारी पर विवाद गर्म रहे।
डैमेज कंट्रोल: सरकार की रणनीति
योगी सरकार ने कई विवादों में डैमेज कंट्रोल किया। कानून व्यवस्था,
विकास कार्य और गरीब कल्याण योजनाओं को प्रचारित किया।
बुलडोजर एक्शन और एनकाउंटर पर सवाल उठे, लेकिन सरकार ने सख्ती का बचाव किया।
विपक्ष की चुनौती: एकता की कमी
विपक्ष में एकता की कमी दिखी। अखिलेश यादव ने सपा को मजबूत किया, लेकिन गठबंधन नहीं बना।
कांग्रेस राहुल गांधी की यात्राओं पर निर्भर रही। बसपा अकेले चली।
चुनावी तैयारी: 2027 का पूर्वाभ्यास
साल भर पंचायत और निकाय चुनावों के जरिए 2027 की तैयारी हुई।
भाजपा ने संगठन मजबूत किया। विपक्ष ने जातिगत समीकरण साधे।
निष्कर्ष: उथल-पुथल भरा साल
यूपी 2025 राम मंदिर से मायावती कमबैक तक विवादों का साल रहा।
बगावत, आरोप और डैमेज कंट्रोल ने सुर्खियां बटोरीं। 2027 की तैयारी शुरू हो गई है। राजनीति रोचक रहेगी।