नवजात को नदी किनारे दबाया… कुदरत ने बचाया
शाहजहांपुर की दर्दनाक घटना, मासूम की हालत नाजुक, मेडिकल कॉलेज में भर्ती
संवाददाता – शाहजहांपुर/जेतीपुर
घटना का खुलासा
शाहजहांपुर ज़िले के जेतीपुर थाना क्षेत्र में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई।
रविवार की सुबह करीब नौ बजे एक बालक बकरियां चराने के लिए नदी किनारे गया।
नदी के किनारे बहलूलपुर गांव के पास बने पुल के नीचे अचानक उसे रोने की आवाज सुनाई दी।
पहले उसने सोचा कि शायद कोई पिल्ला या जानवर हो।
लेकिन जब ध्यान से सुना तो आवाज इंसानी बच्चे की लग रही थी।
वह तुरंत आवाज की दिशा में गया।
वहां उसने देखा कि मिट्टी में एक नन्हा हाथ बाहर निकला हुआ है।
हाथ खून से लथपथ था और उसमें कोई हलचल हो रही थी।
पास जाकर पता चला कि वहां एक नवजात बच्ची ज़िंदा दबी हुई है।
मासूम की हालत
बच्ची को मिट्टी में दबाकर छोड़ दिया गया था।
सिर्फ उसका हाथ बाहर निकला हुआ था।
हाथ पर चोटों के निशान साफ दिखाई दे रहे थे।
चींटियां और कीड़े-मकोड़े बच्चे के शरीर को बुरी तरह काट चुके थे।
बच्ची की उंगलियां खून से सनी हुई थीं।
चेहरे पर भी मिट्टी और चोटों के निशान साफ झलक रहे थे।
हालत बेहद गंभीर थी।
लेकिन रोने की आवाज़ से यह साफ था कि बच्ची अभी जिंदा है।
उसकी साँसें कमजोर थीं और वह लगातार तड़प रही थी।
ग्रामीणों की प्रतिक्रिया
बालक ने तुरंत दौड़कर यह बात अपने घरवालों को बताई।
उसकी मां नीरज और अन्य परिजन मौके पर पहुंचे।
लोगों ने मिट्टी हटाकर बच्ची को बाहर निकाला।
जैसे ही बच्ची बाहर आई, लोगों की आंखें नम हो गईं।
ग्रामीणों ने घटना की सूचना पुलिस को दी।
कुछ ही देर में पुलिस भी वहां पहुँच गई।
बच्ची की हालत देखकर सब हैरान रह गए।
पुलिस ने बच्ची को तुरंत जेतीपुर के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा।
वहां से हालत गंभीर देखकर उसे शाहजहांपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
पुलिस की पड़ताल
पुलिस ने मौके की जांच की।
जांच में पता चला कि बच्ची को जानबूझकर दबाया गया था।
करीब दो फुट गहरा गड्ढा खोदकर बच्ची को उसमें रखा गया।
ऊपर से मिट्टी डाल दी गई ताकि कोई पहचान न सके।
पुलिस का मानना है कि यह बच्ची जन्म के बाद कुछ दिनों तक घर पर रही थी।
इसके शरीर पर जो चोटें और निशान हैं, उससे यही आकलन लगाया गया।
माथे पर तिलक का भी निशान पाया गया।
संभावना है कि छठ पूजा के समय उसे तिलक लगाया गया हो।
इससे साफ होता है कि बच्ची को परिवार ने ही कुछ दिन तक रखा था।
लेकिन बाद में किसी कारण उसे मिट्टी में दबा दिया गया।
पुलिस अब आसपास के गांवों में जांच कर रही है।
मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए डीएनए टेस्ट तक कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।
मासूम की स्थिति
मेडिकल कॉलेज में बच्ची को भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों का कहना है कि बच्ची की हालत बेहद नाजुक है।
उसके हाथ और शरीर पर गहरे घाव हैं।
संक्रमण फैलने का भी खतरा है।
लगातार डॉक्टरों की टीम उसकी देखरेख कर रही है।
आईसीयू में उसे विशेष निगरानी में रखा गया है।
डॉक्टरों ने कहा कि अगर इलाज सही ढंग से चला तो बच्ची की जान बच सकती है।
लेकिन स्थिति गंभीर बनी हुई है।
समाज में आक्रोश
घटना की खबर जैसे ही फैली, पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया।
लोगों ने इसे अमानवीय कृत्य बताया।
ग्रामीणों का कहना है कि जिसने भी यह काम किया है, वह इंसान कहलाने लायक नहीं है।
एक मासूम को मौत के मुंह में धकेलना सबसे बड़ा पाप है।
कई लोगों ने बच्ची को गोद लेने की इच्छा भी जताई।
सोशल मीडिया पर भी घटना की तीखी प्रतिक्रिया आई।
लोगों ने लिखा कि बेटियों को बोझ समझने वाली मानसिकता समाज के लिए कलंक है।
कानून का पहलू
इस मामले में पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
भारतीय दंड संहिता के तहत यह हत्या का प्रयास माना जाएगा।
ऐसे मामलों में सख्त से सख्त सज़ा का प्रावधान है।
पुलिस टीम आसपास के अस्पतालों और दाईयों से भी पूछताछ कर रही है।
यह पता लगाया जा रहा है कि हाल ही में किस घर में बच्ची का जन्म हुआ था।
दर्दनाक सवाल
यह घटना समाज के सामने कई सवाल खड़े करती है।
क्यों आज भी लोग बेटियों को बोझ मानते हैं?
क्यों मासूम बच्चियों की जिंदगी छीन ली जाती है?
सरकार और समाज बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की बात करते हैं, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग है।
ऐसे मामलों से साफ है कि जागरूकता की अभी भी भारी कमी है।
कुदरत का करिश्मा
अगर बच्ची का हाथ मिट्टी से बाहर न होता तो शायद उसकी जिंदगी बचना मुश्किल था।
रोने की आवाज ने ही उसे जीवनदान दिया।
ग्रामीणों ने कहा कि यह किसी चमत्कार से कम नहीं है।
कुदरत ने उसे मौत से छीनकर वापस जिंदगी दे दी।
निष्कर्ष
शाहजहांपुर की यह घटना पूरे समाज को झकझोर देने वाली है।
यह इंसानियत पर बड़ा सवाल है।
एक तरफ लोग कन्या पूजन करते हैं, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं शर्मसार करती हैं।
जरूरत है कि समाज मानसिकता बदले और बच्चियों को बोझ न समझे।
फिलहाल मासूम जिंदगी और मौत से जूझ रही है।
पूरे इलाके की दुआएं उसके साथ हैं।
लोग चाहते हैं कि बच्ची जल्दी स्वस्थ हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा मिले।