उत्तर प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिल रही है। राज्य सरकार ने गंगा नदी पर एक भव्य फोरलेन ब्रिज बनाने की योजना को मंजूरी दे दी है। यह ब्रिज 3 किलोमीटर से अधिक लंबा होगा और यूपी के एक प्रमुख जिले को केंद्र बनाकर चार जिलों की कनेक्टिविटी मजबूत करेगा। गोरखपुर समेत इन जिलों के लाखों यात्रियों की राह आसान हो जाएगी। यह परियोजना न केवल यात्रा समय घटाएगी बल्कि क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगी। गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया और महाराजगंज के निवासियों को सीधी राहत मिलेगी, जहां वर्तमान में गंगा क्रॉसिंग पर घंटों जाम लगता है।
गंगा पर नया फोरलेन ब्रिज: लोकेशन और महत्व
यह ब्रिज गंगा नदी के उस हिस्से पर बनेगा जहां वर्तमान में पुलों की कमी से यातायात बाधित रहता है। जिले का नाम अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है लेकिन स्रोतों के अनुसार यह गोरखपुर डिवीजन के अंतर्गत आ रहा है। ब्रिज गोरखपुर क्षेत्र को पूर्वी यूपी और नेपाल बॉर्डर से बेहतर जोड़ेगा।
यह परियोजना यूपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, जो ट्रैफिक जाम खत्म करेगी और आर्थिक विकास को गति देगी। पूर्वांचल के इन चार जिलों में व्यापार, कृषि उत्पादों की ढुलाई और पर्यटन बढ़ेगा। गोरखपुर से कुशीनगर, देवरिया और महाराजगंज जाने वाले यात्रियों को घंटों की बचत होगी। भारी वाहनों की आवाजाही सुगम होने से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और स्थानीय बाजार मजबूत होंगे।
ब्रिज की विशेषताएं और निर्माण योजना
यह ब्रिज 3.2 किलोमीटर लंबा होगा, जिसमें फोरलेन सड़क के साथ पैदल मार्ग और आधुनिक लाइटिंग सिस्टम शामिल होगा। डिजाइन में भूकंप प्रतिरोधक क्षमता और पर्यावरण संरक्षण का पूरा ध्यान रखा गया है। निर्माण कार्य 2026 में शुरू होने की उम्मीद है। केंद्र और राज्य सरकार ने संयुक्त फंडिंग की व्यवस्था की है, जिसमें NHAI और राज्य सेतु निगम की भूमिका प्रमुख होगी।
बजट की अनुमानित राशि सैकड़ों करोड़ में है, जो पूरे क्षेत्र के विकास के लिए निवेश साबित होगा।
ब्रिज के साथ अप्रोच रोड्स भी चौड़ी होंगी, जिससे आसपास के गांवों को भी फायदा मिलेगा।
प्री-कास्ट तकनीक से निर्माण तेजी से पूरा होगा, ताकि समयसीमा पर ध्यान रहे।
यात्रियों और अर्थव्यवस्था को क्या फायदा?
ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलने से दैनिक यातायात सुगम होगा। गोरखपुर से कुशीनगर के बौद्ध सर्किट, देवरिया और
महाराजगंज के बाजारों तक पहुंच आसान बनेगी। व्यापारियों को माल ढुलाई में समय और ईंधन की बचत होगी।
पर्यटन बढ़ेगा, क्योंकि गोरखपुर से नेपाल बॉर्डर तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी।
स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे—निर्माण के दौरान हजारों मजदूरों को काम मिलेगा और बाद में
मेंटेनेंस से स्थायी रोजगार। क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी, क्योंकि बेहतर सड़कें निवेश आकर्षित करेंगी।
किसानों को अपने उत्पाद बाजार तक जल्दी पहुंचाने में मदद मिलेगी।
गंगा पर 3 किमी लंबा फोरलेन ब्रिज पूर्वांचल के विकास की नई इबारत लिखेगा।
गोरखपुर समेत चार जिलों को मिलने वाली यह राहत योगी सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर नीति का मजबूत उदाहरण है।
2026 में शुरू होने वाला यह प्रोजेक्ट क्षेत्र को राष्ट्रीय मुख्यधारा से और मजबूती से जोड़ेगा।