पत्र का परिचय और पृष्ठभूमि
13 फरवरी 2026 को शांतिवंश शोध पुस्तकालय, गोरखपुर से जारी किया गया यह खुला पत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित है। पत्र में ‘इंकलाब 14 अप्रैल 2026’ का जिक्र करते हुए कांग्रेस मुक्त भारत के बयान पर सवाल उठाए गए हैं। लेखक डॉ. संपूर्णानंद मल्लपूर्वांचल गांधी ने लोकतंत्र की रक्षा की अपील की है, जिसमें गांधी, नेहरू, पटेल, अंबेडकर, सुभाष बोस, भगत सिंह जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का हवाला दिया गया है। यह पत्र राजनीतिक बहस को नई दिशा देता है, जहां सत्ता के दुरुपयोग पर चिंता जताई गई है। पत्र की भाषा में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा पर जोर है, और यह फासीवाद तथा तानाशाही के खिलाफ एक मजबूत स्टैंड लेता है। भारत की वर्तमान राजनीतिक स्थिति में यह पत्र एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बन सकता है, जो विपक्ष की भूमिका को डेमोक्रेसी का हृदय बताता है।
कांग्रेस मुक्त भारत बयान पर सवाल
पत्र में पीएम मोदी के 2014 के बयान “कांग्रेस मुक्त भारत कर दूंगा” का जिक्र है। लेखक का कहना है कि ऐसा बयान ब्रिटिश हुकूमत ने भी कांग्रेस के लिए नहीं दिया था। अंग्रेज हमेशा कोशिश करते रहे कि कांग्रेस धीरे-धीरे मर जाए, लेकिन ब्रिटिश हुकूमत का ही अंत हो गया। यकीन मानिए, आपकी सत्ता गांधी, पटेल, नेहरू, अंबेडकर, सुभाष, भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु, बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, रोशन सिंह, राजेंद्र लाहिड़ी, उधम सिंह, मदन लाल ढींगरा, चंद्रशेखर आजाद आदि के हिंदुस्तान के लिए भारी पड़ रही है।
अब अनाज खाने वाली एवं संविधान में विश्वास रखने वाली हर वर्ग एवं व्यक्ति का यह धर्म एवं कर्तव्य हो गया है कि आपकी सत्ता समाप्त कर दें। क्या यह बयान लोकतांत्रिक है?🙏 आप बताइए, क्या यह ‘डेमोक्रेटिक’ बयान है? क्या यह तानाशाही एवं फासीवाद से अभिन्न नहीं है? 🙏 मैं आपकी नफरती एवं हिंसक सत्ता का पतन चाहता हूं। इसका यह अर्थ नहीं कि मैं भाजपा का पतन चाहता हूं, क्योंकि प्रतिपक्ष “डेमोक्रेसी रूपी हृदय” का एक भाग है। इसलिए कभी भाजपा, कभी कांग्रेस, कभी कोई और दल जो सत्ता का भूखा है, सत्ता में रहेगा। 🙏 लेकिन विपक्ष का जीवित रहना डेमोक्रेसी के जीवित रहने की शर्त है।
जवाब की मांग और इंकलाब की योजना
महोदय, पत्र का जवाब दीजिए वरना…मुझे मेरे पत्र का जवाब चाहिए। अन्यथा “मोदी रहित भारतीय राजनीति” के लिए ‘रिवॉल्यूशन’ करूंगा (भाजपा के लिए नहीं)। दूसरे शब्दों में, बेरोजगारी, गरीबी, विषमता, महंगाई, भय, नफरत, बलात्कार, हिंसा, आटा, चावल, दाल, तेल, चीनी, दूध, दवा, शिक्षा, चिकित्सा, रेल पर टैक्स, सड़कों पर निजी गाड़ियों पर टोल टैक्स, जल-जंगल-जमीन के विनाश के विरुद्ध एवं गरीब-अमीर सबके लिए निशुल्क “एक विद्यालय”, “एक चिकित्सालय”, “एक रेल” के लिए समता पुरुष अंबेडकर जयंती 14 अप्रैल संसद पर इंकलाब करूंगा। सत्य-अहिंसा के साथ, शांतिपूर्ण तरीके से, हथियार रहित।
आपका सच कहूंगा और आपकी हुकूमत बालू की भीत की तरह गिर जाएगी। यह इंकलाब संसद के सामने
‘सम्मान के साथ’ होगा, जहां सामाजिक न्याय और समानता की मांग की जाएगी।
पत्र में बेरोजगारी, महंगाई, नफरत और हिंसा जैसे मुद्दों पर फोकस है,
जो भारत की वर्तमान चुनौतियों को उजागर करता है।
अपील न्यायिक और प्रशासनिक संस्थाओं को
माननीय मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय, सभी मा. मुख्य न्यायाधीश हाईकोर्ट्स, मा. राष्ट्रपति, गृह मंत्री, सभी मा. गवर्नर,
सभी मा. मुख्यमंत्री गण, मा. अध्यक्ष राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, श्रीमान निदेशक सीबीआई, ईडी।
पत्र में इन सभी को संबोधित किया गया है, ताकि लोकतंत्र की रक्षा के लिए
सामूहिक प्रयास हो। लेखक का मानना है कि
सत्ता का दुरुपयोग संविधान के खिलाफ है, और शांतिपूर्ण इंकलाब के माध्यम से परिवर्तन लाया जा सकता है।
यह अपील भारत के हर नागरिक को लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाती है।
निष्कर्ष: लोकतंत्र की रक्षा का आह्वान
यह पत्र भारत की राजनीति में एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप है, जो फासीवाद के खिलाफ चेतावनी देता है।
इंकलाब 14 अप्रैल 2026 को अंबेडकर जयंती पर संसद के
सामने शांतिपूर्ण प्रदर्शन की योजना है, जो समानता और न्याय पर आधारित है