
गोरखपुर जनपद में सर्पदंश जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में उरुवा बाजार स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सभागार में सर्पदंश की रोकथाम, पहचान और प्राथमिक उपचार से संबंधित दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में कुल 112 आशा कार्यकर्ताओं ने भाग लिया, जिन्हें सर्पदंश के मामलों में त्वरित और सही उपचार देने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार का सर्पदंश न्यूनीकरण अभियान तेज
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार राहत आयुक्त कार्यालय, गोरखपुर के सहयोग से आयोजित किया गया। सर्पदंश न्यूनीकरण कार्यक्रम को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए यह तीसरे चरण का महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे पहले पहले चरण में सभी चिकित्साधिकारियों और दूसरे चरण में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारियों तथा फार्मासिस्टों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
अब तीसरे चरण में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है, जिससे गांव स्तर पर सर्पदंश के मामलों में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाना और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है, ताकि सर्पदंश से होने वाली मौतों में कमी लाई जा सके।
विशेषज्ञों और अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) सभाजीत, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. जेपी तिवारी, ए.आर.ओ. अखिलेश कुमार पाठक और स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी दीपक कुमार के नेतृत्व में किया गया। साथ ही सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी ज्योति, पूनम मौर्या, शुभम कुमार चौबे और बीएचडब्ल्यू अजय कुमार व सत्यपाल सिंह ने भी प्रशिक्षण को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर नवनीत प्रताप सिंह के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम में आपदा कार्यालय द्वारा नामित मास्टर प्रशिक्षक विक्रम कुमार गौड़ और आपदा मित्र चंद्रजीत ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने प्रशिक्षण को व्यावहारिक और प्रभावी बनाने के लिए प्रतिभागियों को वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से जानकारी दी।
ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन रक्षक साबित होगा यह अभियान
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल जनपद में सर्पदंश से होने वाली घटनाओं को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाती, वहां प्रशिक्षित आशा कार्यकर्ता प्राथमिक उपचार देकर मरीज की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
स्थानीय प्रशासन ने इस अभियान को जनहित में अत्यंत उपयोगी बताते हुए इसे लगातार जारी रखने की बात कही है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत बनाया जा सकता है और आपदा जैसी स्थितियों में बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।
सर्पदंश के मामलों में बढ़ेगी जागरूकता और घटेगी मृत्यु दर
इस प्रशिक्षण के माध्यम से आशा कार्यकर्ताओं को यह भी बताया गया कि सर्पदंश के बाद क्या करें और क्या न करें, जिससे गलत उपचार से होने वाली मौतों को रोका जा सके। उन्हें प्राथमिक चिकित्सा, मरीज को स्थिर रखने और तुरंत अस्पताल पहुंचाने के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
इस पहल से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि ग्रामीण जनता में जागरूकता भी बढ़ेगी। आने वाले समय में यह कार्यक्रम सर्पदंश से होने वाली मौतों को कम करने में निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
