🪔 हिंदू पंचांग के अनुसार, 2026 का साल विशेष होगा क्योंकि इसमें अधिक मास लगेगा। इस कारण सामान्य 12 महीनों की जगह 13 महीने होंगे। अधिक मास हिंदू चंद्र कैलेंडर का एक दुर्लभ योग है, जो हर 2.5 से 3 साल में एक बार आता है। यह चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच के अंतर को समायोजित करने के लिए लगाया जाता है। चंद्र वर्ष में लगभग 354 दिन होते हैं, जबकि सौर वर्ष में 365 दिन। इस अंतर को भरने के लिए अधिक मास जोड़ा जाता है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। अधिक मास 2026 में आषाढ़ के बाद लगेगा, यानी जुलाई-अगस्त के आसपास।
इस मास में भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है और दान-पुण्य का फल हजार गुना मिलता है। अधिक मास में शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि वर्जित माने जाते हैं, लेकिन भक्ति, जप, दान और व्रत अत्यंत शुभ होते हैं। यह मास आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर है। अधिक मास की वजह से त्योहारों की तिथियां भी प्रभावित होंगी – जैसे श्रावण मास दो बार आएगा। पंचांग विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक मास का योग दुर्लभ है और इसे भगवान की विशेष कृपा माना जाता है। इस दौरान किए गए पुण्य कार्यों का फल अन्य मासों से अधिक मिलता है। अधिक मास में मंदिरों में विशेष कथा और पूजा होती है।
यह योग हिंदू कैलेंडर की वैज्ञानिकता दिखाता है, जो चंद्रमा की गति पर आधारित है। यदि आप धार्मिक कार्य करते हैं, तो अधिक मास की तिथियां नोट कर लें। यह मास भक्ति और समर्पण का समय है। अधिक मास 2026 में लगने से साल लंबा होगा और धार्मिक गतिविधियां बढ़ेंगी। यह ब्लॉग अधिक मास के कारण, महत्व और प्रभाव की पूरी जानकारी देगा। अधिक मास शुभ हो!
अधिक मास का कारण: चंद्र-सौर वर्ष समन्वय
हिंदू पंचांग चंद्रमा पर आधारित है। मुख्य कारण:
- चंद्र वर्ष: 354 दिन।
- सौर वर्ष: 365 दिन।
- अंतर: लगभग 11 दिन।
- हर 3 साल में अंतर भरने के लिए अधिक मास।
- अधिक मास: एक मास की दोहराव।
- पुरुषोत्तम मास नाम।
- विष्णु समर्पित।
यह योग कैलेंडर संतुलित रखता है।
अधिक मास 2026: कब और कैसे लगेगा
2026 में अधिक मास की जानकारी:
- आषाढ़ के बाद।
- जुलाई-अगस्त 2026।
- लगभग 29-30 दिन।
- श्रावण दो बार।
- त्योहार तिथियां शिफ्ट।
- मुख्य पूजा और व्रत।
- पंचांग अनुसार सटीक तिथि।
यह साल 13 महीने का बनेगा।
महत्व: दुर्लभ योग और पुण्य फल
अधिक मास का विशेष महत्व:
- पुरुषोत्तम मास।
- पुण्य हजार गुना।
- भक्ति और दान शुभ।
- विष्णु पूजा।
- आत्मशुद्धि।
- शुभ कार्य वर्जित।
- विवाह आदि नहीं।
यह मास आध्यात्मिक लाभ देता है।
प्रभाव: त्योहार और शुभ कार्य
अधिक मास से असर:
- त्योहार तिथियां बदलेंगी।
- रक्षाबंधन, जन्माष्टमी शिफ्ट।
- श्रावण दो बार।
- विवाह मुहूर्त कम।
- धार्मिक आयोजन बढ़ेंगे।
- पंचांग फॉलो जरूरी।
- नए साल प्रभाव।
शुभ कार्य अधिक मास बाद करें।
शुभ कार्य: अधिक मास में क्या करें
अधिक मास में अनुशंसित:
- विष्णु सहस्रनाम।
- दान और पुण्य।
- व्रत-उपवास।
- कथा और कीर्तन।
- मंदिर दर्शन।
- गरीब मदद।
- जप और ध्यान।
ये कार्य विशेष फल देते हैं।
