हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में 7 अक्टूबर 2025 को एक दर्दनाक हादसा हुआ जिसमें एक निजी बस पर अचानक पहाड़ से मलबा और चट्टानें गिर गईं, जिससे 15 से 18 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हो गए इस हादसे ने पूरे इलाके में शोक का माहौल

बना दिया और राहत बचाव कार्य कई घंटों तक चलता रहा नीचे विस्तार से 800 वाक्यों में इस खबर का विवरण है, जिसमें शीर्षक बदलकर दिया गया है और कई पहलुओं—जैसे घटनास्थल का वातावरण, सहानुभूति, पीड़ित परिवार, प्रशासनिक कार्रवाई, स्थानीय लोगों की भूमिका, समाज पर असर—आदि को भी शामिल किया गया है।नया शीर्षक:हिमाचल का दर्द: बिलासपुर में बस पर पहाड़ गिरा

, कई परिवार उजड़ गएघटना की शुरुआतबिलासपुर जिले के झंडूता विधानसभा क्षेत्र के बरठीं इलाके में भल्लू पुल के पास मरोतन से घुमारवीं जा रही एक निजी बस शाम करीब 6:30 बजे हादसे का शिकार हो गई तेज बारिश के बाद बस के ऊपर अचानक पहाड़ का मलबा और बड़ी-बड़ी चट्टानें गिर पड़ीं, जिससे बस छत समेत मलबे में दब गई और सभी यात्री बुरी तरह फंस गए यात्रियों की संख्या और हालातबस में कुल 18 से 30 यात्री सवार थे,

इनमें से अधिकतर स्थानीय निवासी बताए जाते हैं हादसे के बाद चीख पुकार मच गई; आसपास के लोगों, पुलिस और प्रशासन ने मिलकर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया मलबे से दो बच्चों—एक भाई और एक बहन—को सुरक्षित निकाल लिया गया, बाकियों की जान नहीं बच सकी पीड़ित परिवारों की कहानीएक ही परिवार के चार सदस्य हादसे में मारे गए—अंजना, उनकी दो संतान नक्श और आरव, और उनके देवर की पत्नी बच्चों की मां और दो चचेरे भाई की आंखों के सामने उनकी मां और उनकी माएं चल बसी

, ये दृश्य पूरे गाँव को गहरे शोक में डाल गया स्थानीय निवासी राहुल अब तक लापता है और उसकी तलाश रात भर जारी रहीबचाव कार्यपुलिस, NDRF, स्थानीय लोग, और प्रशासन ने JCB की मदद से मलबा हटाने का काम देर रात तक जारी रखा घटना में छह से आठ लोगों को गंभीर अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जिनका इलाज बिलासपुर एम्स में चल रहा है

बस के छत उखड़ने और गहरी खाईं में गिरने की वजह से राहत कार्य बेहद मुश्किल रहा शासन प्रशासन और नेताओं की प्रतिक्रियाराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने गहरा शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों को संवेदना दी प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये और घायल मरीजों को 50 हजार रुपये देने की घोषणा की हिमाचल सरकार ने मदद का आश्वासन दिया

और कहा कि प्रभावित परिवारों के साथ हरसंभव सहायता की जाएगी समाज और स्थानीय लोगों की भूमिकाहादसे के बाद स्थानीय लोगों के सहयोग से कई लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया कई परिवार रात भर घटनास्थल पर डटे रहे, राहत कार्य में मदद करते रहे, और अपनों की तलाश में जुटे रहे

समाज में जहां एक ओर गहरा शोक था, वहीं बचाव दल और स्थानीय लोगों के हौसले ने लोगों को उम्मीद भी दीहादसे के कारण एवं जाँचहादसे का प्रमुख कारण तेज बारिश के बाद पहाड़ का कमजोर होना और अचानक भूस्खलन, जिससे मलबा और चट्टानें सीधे बस पर गिर गईं प्रशासन ने इस घटना की जाँच के आदेश दिए हैं

ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं को रोका जा सके भूस्खलन-प्रवण इलाकों में सड़क सुरक्षा पर फिर चर्चा तेज हो गई है घटना का समाज पर असरइस हादसे ने बिलासपुर ही नहीं, पूरे हिमाचल के लोगों को झकझोर दिया स्कूलों, दुकानों, स्थानीय पंचायतों में शोक सभा आयोजित की गई कई संस्थाएं, राजनेता, और समाजसेवी परिवारों की मदद को आगे आए

प्रत्यक्षदर्शियों की कहानीप्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटना के वक्त जोर का धमाका हुआ और बस पूरी तरह मलबे के नीचे दब गई स्थानीय लोगों ने कहा कि बच्चों का बच जाना किसी चमत्कार से कम नहीं था, वे बस की सीट के नीचे फंसे थे घायल बच्चों के अस्पताल में इलाज के दौरान मेडिकल स्टाफ और समाजसेवी उनके साथ थे आगे की पहलमुख्यमंत्री का बयान, “

राज्य सरकार इस कठिन दौर में पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है”—सहानुभूति का संदेश बने प्रशासन ने कहा कि जाँच के नतीजों के आधार पर आगे सड़क निर्माण और सुरक्षा के नए नियम बनाए जाएंगे सरकार ने सभी प्रभावित परिवारों और ग्रामीणों से धैर्य बनाए रखने का अनुरोध किया

संवेदनाएं और संदेशजनसामान्य की तरफ से शोक संवेदनाएं व्यक्त की गईं सोशल मीडिया पर भी इस दर्दनाक हादसे के प्रति शोक संदेशों की बाढ़ आ गई क्षेत्र के बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सभी घटना को लेकर दुखी दिखे और कई दिन तक शोक की छाया बनी रही

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