हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को लेकर दिए गए एक बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। ट्रंप ने एक रैली में कहा कि यदि भारत अमेरिका की प्रशंसा या समर्थन नहीं करता, तो वे भारत को “सबक सिखाने” से नहीं हिचकिचाएंगे। इस धमकी भरे लहजे को कई विशेषज्ञ एक कूटनीतिक दबाव रणनीति के रूप में देख रहे हैं, वहीं भारत सरकार ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान उस समय आया जब वे अमेरिकी चुनाव प्रचार में चीन और भारत जैसे देशों को लेकर सख्त रुख अपनाने की बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि “भारत केवल लेता है, देता कुछ नहीं।” इस टिप्पणी को भारत ने केवल “राजनीतिक बयानबाज़ी” नहीं माना, बल्कि एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र के सम्मान पर सीधा प्रहार बताया।
इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भारत की भूमिका संयुक्त राष्ट्र और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों में संदेहास्पद रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारत और चीन दोनों वैश्विक मंचों पर अमेरिका को नीचा दिखाने की रणनीति बना रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की कुछ हालिया रिपोर्टों में भी भारत की नीतियों की आलोचना की गई है, जिससे यह प्रतीत होता है कि अमेरिका और यूएन दोनों किसी रणनीतिक उद्देश्य के तहत भारत को दबाव में लेने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति स्वतंत्र है और वह किसी भी देश की धमकी से नहीं झुकेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि “भारत न तो किसी की प्रशंसा की अपेक्षा करता है, न ही किसी के भय से अपनी नीति तय करता है।” साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “कुछ देशों की चुनावी राजनीति में भारत का इस्तेमाल करना दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है।”
भारत ने ट्रंप के बयान को अमेरिका की आंतरिक राजनीति का हिस्सा बताया, लेकिन इसके पीछे की मंशा पर सवाल खड़े किए। भारत के अनुसार, यह कोई सामान्य वक्तव्य नहीं, बल्कि एक सुनियोजित प्रयास है—भारत को वैश्विक मंचों पर नीचा दिखाने और दबाव बनाने का। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रचनात्मक और सहयोगात्मक भूमिका निभाता रहा है।
इस घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया तनाव पैदा कर दिया है। जबकि दोनों देश हाल के वर्षों में रक्षा, व्यापार और तकनीकी सहयोग में नजदीक आए हैं, ऐसे बयान दोनों देशों के रिश्तों में दरार डाल सकते हैं।
निष्कर्षतः, ट्रंप का बयान एक ओर जहां भारत के लिए अपमानजनक था, वहीं इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती ताकत अब कई शक्तियों को असहज कर रही है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आत्मसम्मान से समझौता नहीं करेगा और न ही किसी धमकी के आगे झुकेगा। समय बताएगा कि अमेरिका और यूएन जैसे संस्थान भारत के साथ समानता और सम्मान का व्यवहार करते हैं या नहीं।