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चीन से सीमा व्यापार फिर होगा शुरू, दुर्लभ खनिजों व उर्वरक की आपूर्ति पर भी सहमति
सीमा विवाद के समाधान के लिए ‘विरोझ समूह बनाएंगे भारत-चीन
सीधी उड़ान और वीज़ा सुविधा की बहाली, कैलाश मानसरोवर ज्यादा तीर्थ यात्री जाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ट्रेड टेंशन और आर्थिक प्रतिबंधों के बीच भारत और चीन ने सीमा व्यापार बहाल करने और आपसी व्यापारिक संबंध बेहतर बनाने पर सहमति जताई है। दोनों देशों के बीच 2026 तक दुर्लभ खनिज, उर्वरक और कृषि उत्पादों की आपूर्ति को बढ़ाने के लिए रोडमैप तैयार किया जाएगा।
सीमा विवाद के समाधान के लिए दोनों देशों के बीच विदेश मंत्रियों की अगुवाई में एक विशेष समूह बनाया जाएगा। इसके साथ ही सीमा विवाद के चलते बंद हुआ निपुचुंग-शिकपी ला व नामु ला दर्रे से व्यापार फिर से शुरू होगा।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच मंगलवार को कजाखिस्तान की राजधानी अस्ताना में हुई बैठक में यह सहमति बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच भविष्य में बैठक कराने पर भी सहमति बनी है।
निपुचुंग, शिकपी ला व नामु ला से व्यापार फिर होगा शुरू
भारत-चीन सीमा के तीनों दर्रे 12 जुलाई 2015 से बंद हैं, इनमें विभिन्न वस्तुओं का व्यापार होता था। इनमें मुख्य रूप से सेब, ऊन, बकरी का दूध, पशु, कपड़े, फर्नीचर, चीनी, चावल, खाद्य तेल, औषधियां, मसाले, नमक और बर्तन शामिल थे। अब इन दर्रों से फिर से व्यापार शुरू होगा।
सीमा विवाद के समाधान के लिए विशेष समूह
दोनों देशों ने यह तय किया कि विदेश मंत्रियों के स्तर पर एक विशेष समूह बनेगा, जो दोनों देशों के सीमा विवाद और मतभेदों का समाधान खोजेगा। यह समूह सैन्य और राजनयिक वार्ताओं के जरिए समाधान ढूंढने का प्रयास करेगा।
सीधी उड़ान और वीज़ा सुविधा की बहाली
बैठक में यह भी सहमति बनी कि दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू की जाएंगी और वीज़ा सुविधा बहाल होगी। इससे कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले अधिक श्रद्धालु तीर्थ यात्री लाभान्वित होंगे।
रणनीतिक स्तर पर संवाद बहाली
भारत और चीन के बीच 2020 के गलवान विवाद के बाद से रणनीतिक और आर्थिक संवाद बाधित हो गया था। अब इसे फिर से शुरू करने का निर्णय लिया गया है।
व्यापार पर सहमति
बैठक में ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स और खनिजों के व्यापार को लेकर भी चर्चा हुई। दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति को लेकर एक रोडमैप तैयार किया जाएगा, जिसमें अगले दो वर्षों में आपूर्ति दोगुनी करने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि क्षेत्र पर जोर
भारत से चीन को कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाने पर भी सहमति बनी। भारत से दूध उत्पाद, मांस और दालों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा।
जलवायु परिवर्तन पर सहयोग
भारत और चीन ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए आपसी सहयोग और तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने का भी निर्णय लिया