भारत की शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट, 40 से घटकर 25 पर पहुँची
फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ चैनल की विशेष रिपोर्ट
भारत की शिशु मृत्यु दर में ऐतिहासिक गिरावट, 40 से घटकर 25 पर पहुँची
नई दिल्ली से बड़ी खबर सामने आई है। भारत में शिशु मृत्यु दर (IMR) में अभूतपूर्व गिरावट दर्ज की गई है। देश की स्वास्थ्य सेवाओं और जनजागरूकता में सुधार का सीधा असर अब दिखाई दे रहा है। वर्ष 2013 में जहाँ हर 1,000 नवजात शिशुओं में से 40 की मृत्यु हो जाती थी, वहीं 2023 तक यह दर घटकर मात्र 25 रह गई है। यह 12 साल में 37.5 प्रतिशत की रिकॉर्ड गिरावट है, जिसे देश की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
यह आंकड़े भारत के महा-नमूना पंजीकरण प्रणाली (Sample Registration System – SRS) 2023 की रिपोर्ट में सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में अब तक का सबसे निचला स्तर दर्ज हुआ है और यह इस बात का प्रमाण है कि स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच गाँव-गाँव तक बेहतर ढंग से पहुँची है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी दिखा असर
रिपोर्ट बताती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शिशु मृत्यु दर में भारी गिरावट हुई है। 2013 में यह दर 44 थी, जो अब घटकर 28 पर आ गई है। यानी 33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह दर 27 से घटकर 18 रह गई है।
राज्यों की स्थिति
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और यूपी में शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक 37 दर्ज की गई है।
मणिपुर में यह दर सबसे कम 3 दर्ज हुई है।
सबसे अधिक सुधार भी मणिपुर और कुछ अन्य उत्तर-पूर्वी राज्यों में देखने को मिला है।
जन्म दर में भी भारी गिरावट
सिर्फ शिशु मृत्यु दर ही नहीं, बल्कि जन्म दर में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई है। वर्ष 2013 में जन्म दर 21.4 थी, जो 2023 में घटकर 18.4 रह गई है। यह लगभग 14 प्रतिशत की कमी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 22.9 से घटकर 20.3 रह गई।
शहरी क्षेत्रों में यह 17.3 से घटकर 14.9 हो गई।
बिहार में 2023 में सबसे अधिक जन्म दर 25.8 रही, जबकि अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में यह सबसे कम 10.1 रही।
ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
अगर हम पिछले पाँच दशकों की बात करें तो यह बदलाव और भी चौंकाने वाला है। 1971 में भारत की शिशु मृत्यु दर 129 थी, जो अब 80 प्रतिशत से अधिक गिरकर 25 रह गई है। इसी तरह जन्म दर भी 1971 में 36.9 थी, जो अब घटकर 18.4 रह गई है।
क्या है शिशु मृत्यु दर (IMR)?
शिशु मृत्यु दर का अर्थ है – किसी विशेष वर्ष में प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर एक वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु की संख्या। यह किसी भी देश के स्वास्थ्य, पोषण और चिकित्सा सुविधाओं का एक प्रमुख सूचकांक है।
निष्कर्ष
भारत की यह उपलब्धि बेहद महत्वपूर्ण है। शिशु मृत्यु दर में कमी का सीधा अर्थ है कि स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार हुआ है, प्रसूता माताओं को समय पर देखभाल मिल रही है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी चिकित्सा सुविधाएँ पहुँच रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत और बेहतर प्रदर्शन कर सकता है और विकसित देशों की श्रेणी में शामिल हो सकता है।
फिशरमैन वर्ल्ड न्यूज़ चैनल के लिए यह रही भारत की ऐतिहासिक उपलब्धि पर विशेष रिपोर्ट।
