मानवर काशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर लखनऊ में हुई मायावती की रैली का पूरा वर्णन, भाषण के प्रमुख भाग, राजनीतिक संदेश, रैली का महत्व, और आगामी चुनावों के लिए इसके प्रभाव शामिल होंगे। कृपया कुछ समय दें,
ताकि मैं इसे सही और विस्तारपूर्वक प्रस्तुत कर सकूं।मानवर काशीराम के परिनिर्वाण दिवस के अवसर पर 9 अक्टूबर 2025 को लखनऊ में बहन कुमारी मायावती ने एक भव्य महारैली को संबोधित किया, जो बसपा के लिए न केवल श्रद्धांजलि सभा थी बल्कि राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी थी।
इस रैली में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों से करीब पांच लाख से अधिक कार्यकर्ता और समर्थक शामिल हुए, जो मायावती और बसपा के प्रति गहरी आस्था और समर्थन को दर्शाता है। मायावती ने करीब तीन घंटे तक मंच से भाषण दिया, जिसमें उन्होंने पार्टी की उपलब्धियों को याद किया
और विपक्षी पार्टियों के खिलाफ तीखे शब्दों में हमला बोला।रैली की शुरुआत काशीराम की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने से हुई, जिसके बाद मायावती ने कहा कि काशीराम का सपना था कि दलित, पिछड़े और अन्य उपेक्षित वर्ग एकजुट होकर सत्ता में पूर्ण बहुमत से आएं।
उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने बसपा के तीन बार यूपी में सरकार बनाई, जो काशीराम के सपने को सच करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि थी। मायावती ने कांग्रेस और भाजपा सरकारों पर आरोप लगाए कि उन्होंने बसपा के नेताओं के खिलाफ सीबीआई और आयकर विभाग के माध्यम से बेवजह कार्रवाई कराकर पार्टी की छवि धूमिल करने की कोशिश की।
उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में जो सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय का शासन था, वह जनता ने कभी नहीं भुलाया।सपा और अखिलेश यादव पर भी मायावती ने कड़ा हमला किया, उनका आरोप था कि जब सत्ता में थे तब उन्होंने काशीराम के नाम पर बनाए गए स्मारकों को बदला और उनकी पार्टी का अपमान किया
। मायावती ने इसे दोहरे चरित्र का प्रदर्शन बताया और लोगों से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि बसपा की सरकार में टिकट के पैसे से कांशीराम स्मारकों की मरम्मत की जाती थी, लेकिन सपा सरकार में ये पैसे खर्च नहीं किए गए। उन्होंने योगी सरकार का आभार जताते हुए कहा कि योगी सरकार ने इन स्थलों की मरम्मत का काम किया और बसपा की बातों पर ध्यान दिया।
मायावती ने पार्टी के नए और युवा नेता आकाश आनंद की जमकर तारीफ की और उनसे हर परिस्थिति में समर्थन करने को कहा। साथ ही यह भी घोषणा की कि बसपा अकेले ही 2027 के विधानसभा चुनावों में पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगी और कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि इस रैली में कोई पैसे लेकर नहीं बल्कि अपनी मेहनत और खून-पसीने से आए लोग शामिल हैं,
जो पार्टी के प्रति वफादारी और प्रेरणा दर्शाता है।रैली की तैयारी में खासतौर पर सुरक्षा व्यवस्था के लिए 2114 पुलिस कर्मी तैनात किए गए थे ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी से बचा जा सके। बसपा ने इस रैली को ऐतिहासिक बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया और चारबाग रेलवे स्टेशन पर कार्यकर्ता सहायता शिविर भी लगाया गया,
जहां से कार्यकर्ताओं को सुविधाएं दी गईं।मायावती के इस भाषण और रैली के जरिए बसपा ने न केवल अपने समर्थकों को संगठित किया बल्कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में अपनी ताकत भी दिखाने की कोशिश की। यह रैली 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए बसपा की रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है, जिसमें पार्टी सत्ता में वापसी का सपना पूरा करने के लिए उत्साहित है
।इस भव्य आयोजन ने मायावती की नेतृत्व क्षमता और संगठनात्मक शक्ति को फिर से साबित किया, जबकि विपक्षी दलों के लिए चुनौतीपूर्ण संदेश भी दिया। मायावती ने अपने भाषण में दलित व पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या को एकजुट करने का आह्वान किया और कहा कि बसपा उनका ही प्रतिनिधि स्वरूप है
जो उनके अधिकारों और सम्मान के लिए लड़ती रहेगी।इस प्रकार, मानवर काशीराम के परिनिर्वाण दिवस पर लखनऊ में हुई यह महारैली बसपा और मायावती के लिए श्रद्धांजलि के साथ-साथ राजनीतिक पुनरुत्थान का प्रतीक बनी, जिसने 2027 चुनावों में पार्टी के मजबूत प्रदर्शन की उम्मीदें जगाईं।
रैली में मायावती का भाषण और कार्यकर्ता संगठित होकर बसपा की वैचारिक धरोहर को जीवित रखने और राजनीतिक मैदान में फिर से प्रबल भूमिका निभाने का संकल्प स्पष्ट रूप से सामने आया।