पापुआ न्यू गिनी की महिलाओं की स्थिति: संघर्ष और सामाजिक विषमताएँपापुआ न्यू गिनी की महिलाएं अत्यंत कठिनाइयों और असमानताओं का सामना कर रही हैं। यहां महिलाओं पर घरेलू हिंसा, यौन शोषण, और लैंगिक भेदभाव के मामले अत्यंत बढ़े हुए हैं।
अनुमान है कि करीब 67% महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार होती हैं, और लगभग आधी महिलाएं यौन उत्पीड़न की घटनाओं का सामना करती हैं। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि महिलाओं के प्रति हिंसा समाज में एक सामान्य स्वीकार्यता बन चुकी है।बहुत से मामलों में पुलिस और अन्य अधिकारी भी महिलाओं के प्रति यौन अत्याचार के दोषी होते हैं,
लेकिन अधिकांश मामलों की जांच या अपराधियों को सजा नहीं मिलती। इससे महिलाओं के लिए न्याय की राह और भी दूर हो जाती है। सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएं महिलाओं की बात उठाने में बड़ी रुकावट हैं, क्योंकि पारंपरिक समाज में महिलाओं को अक्सर कमजोर और निष्क्रिय माना जाता है।सांस्कृतिक प्रथाएं और उनका प्रभावपारंपरिक तौर पर, पापुआ न्यू गिनी में महिलाओं की स्थिति पुरुष प्रधान परिवारिक और सामाजिक संरचना के अधीन है
। यहाँ की सांस्कृतिक प्रथाएं जैसे कि दहेज प्रथा (bride price), बहुपत्नीत्व, और पुरुषों की प्रभुसत्ता महिलाओं के अधिकारों को गंभीर रूप से बाधित करती हैं। ये प्रथाएं महिलाओं को वस्तु की तरह समझने का सामाजिक माहौल बनाती हैं, जो महिलाओं की निर्भरता और दमन को बढ़ावा देती हैं।गांवों और कस्बों में, पुरुष ही अधिकांश निर्णय लेते हैं
और संसाधनों पर नियंत्रण रखते हैं, जबकि महिलाएं घर और परिवार के सीमित दायरे में बंधी रहती हैं। यह लैंगिक असमानता शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, और राजनीतिक भागीदारी में भी स्पष्ट दिखती है। उदाहरण के लिए, संसद में महिलाओं की संख्या कई दशकों से बेहद कम है, जो सरकार में महिलाओं के मुद्दों के लिए प्रभावी आवाज नहीं उठाने देता।स्वास्थ्य व शिक्षा की स्थितिपापुआ न्यू गिनी की महिलाएं स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों में भी अत्यंत पिछड़ी हैं।
गर्भधारण के दौरान माताओं की मृत्यु दर बहुत अधिक है, जिसका मुख्य कारण अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का अभाव है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली अधिकांश महिलाएं स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने से वंचित हैं, जिससे उनकी स्वास्थ्य समस्याएं गंभीर होती हैं।शिक्षा के क्षेत्र में भी लड़कियों का नामांकन और निरंतर अध्यापन बहुत कम है
। गरीबी, ग़रीब परंपराओं और सामाजिक प्रतिबंधों के कारण लड़कियां स्कूल छोड़ देती हैं। यह उनकी सामाजिक और आर्थिक प्रगति के रास्ते में एक बड़ी बाधा है। बिना शिक्षा के वे आत्मनिर्भर होने और अपने अधिकारों के लिए सचेत होने में असमर्थ रहती हैं।हिंसा और कानूनी असफलताएंपापुआ न्यू गिनी में महिलाओं का बहुत बड़ा हिस्सा घरेलू और यौन हिंसा का शिकार है,
लेकिन हिंसा के खिलाफ कानून का प्रवर्तन बहुत कमजोर है। ऐसी घटनाएं न तो ठीक से दर्ज होती हैं और न ही दोषियों की कड़ी सजा होती है। कई बार राजनीतिक और सामाजिक दबाव के कारण पीड़िताओं को न्याय नहीं मिल पाता।सरकार ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को कम करने के लिए कुछ कानून बनाए हैं,
जैसे कि फैमिली प्रोटेक्शन एक्ट और बाल संरक्षण अधिनियम, लेकिन उनकी क्रियान्वयन में कमज़ोरी के कारण ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा। पुलिस बल के प्रशिक्षण और महिलाओं के लिए सहायता सेवाओं का अभाव भी समस्या को बढ़ाता है।महिला सशक्तिकरण और सुधार के प्रयासहालांकि पापुआ न्यू गिनी की महिलाओं के लिए चुनौतियाँ बहुत बड़ी हैं,
सरकार और कई गैर-सरकारी संगठन महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रहे हैं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा रोकने, उन्हें कानूनी सहायता मुहैया कराने, स्वास्थ्य सेवाएं देने और शिक्षा प्रदान करने के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं।संयुक्त राष्ट्र, अमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी इस दिशा में कदम उठा रहे हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, युवाओं को सशक्त करने, और हिंसा की रोकथाम के लिए जनजागृति बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं।
भविष्य में यदि इन प्रयासों को और मजबूती मिले तो महिलाओं की स्थिति में सुधार संभव है।यह व्यापक लेख पापुआ न्यू गिनी की महिलाओं की कठिनाइयों, उनके सामाजिक, आर्थिक, स्वास्थ्य और कानूनी मुद्दों, और सुधार के वर्तमान प्रयासों को विस्तार से बताएगा। इस लेख के माध्यम से पाठक महिलाओं के जीवन की वास्तविक स्थिति को समझ पाएंगे और समाज में उनके अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे।