भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मूल चरित्र समझने के लिए इसके विचारधारात्मक आधार, ऐतिहासिक विकास और राजनीतिक दृष्टिकोण को देखना ज़रूरी है।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भाजपा की जड़ें भारतीय जनसंघ (1951) में हैं, जिसे श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने स्थापित किया था।
जनसंघ का विचारधारात्मक मार्गदर्शन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से मिला, जो हिंदुत्व की विचारधारा पर आधारित है।
1980 में भारतीय जनसंघ से विकसित होकर भारतीय जनता पार्टी बनी।
- विचारधारा
भाजपा का मूल चरित्र “हिंदुत्व” और “सांस्कृतिक राष्ट्रवाद” पर आधारित है।
पार्टी मानती है कि भारत की राष्ट्रीय पहचान इसकी प्राचीन हिंदू संस्कृति और सभ्यता में निहित है।
भाजपा “एक राष्ट्र, एक संस्कृति” की अवधारणा को प्रमुखता देती है।
- प्रमुख विशेषताएँ
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: भारत को केवल भौगोलिक सीमा से नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों से परिभाषित करना।
हिंदुत्व: यह विचार कि हिंदू संस्कृति ही भारत की आत्मा है और अन्य संस्कृतियों को उसी के अनुरूप चलना चाहिए।
राष्ट्रवाद: पार्टी का चरित्र कट्टर राष्ट्रवादी है, जो भारत की संप्रभुता और अखंडता पर विशेष बल देता है।
आर्थिक दृष्टिकोण: प्रारंभ में “स्वदेशी” और संरक्षणवादी नीतियाँ, बाद में उदारीकरण और बाज़ारोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ “राष्ट्रहित” में बदलाव।
सामाजिक दृष्टिकोण: परिवारवाद और नैतिक मूल्यों पर जोर, पश्चिमी संस्कृति की आलोचना।
- राजनीतिक चरित्र
भाजपा खुद को “कॉन्ग्रेस की सेक्युलर राजनीति” के विकल्प के रूप में प्रस्तुत करती है।
इसका मूल चरित्र हिंदू बहुसंख्यक राजनीति पर टिका है।
पार्टी हमेशा “राम मंदिर, समान नागरिक संहिता और धारा 370” जैसे मुद्दों को अपने मूल एजेंडे में रखती आई है।
- वर्तमान रूप
भाजपा ने अपने मूल हिंदुत्व के चरित्र को बरकरार रखते हुए “विकास, सुशासन और राष्ट्रवाद” की छवि भी गढ़ी है।
लेकिन इसकी असली पहचान आज भी हिंदुत्व आधारित सांस्कृतिक राष्ट्रवाद ही है।
👉 संक्षेप में, भाजपा का ओरिजिनल चरित्र हिंदुत्व, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और कट्टर राष्ट्रवादी राजनीति पर आधारित है, जिसमें समय के साथ विकास और आर्थिक सुधार जैसे नए आयाम जुड़े हैं।
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