आत्मनिर्भर भारत पर प्रधानमंत्री मोदी का जोर
दूसरे देशों पर निर्भरता भारत का सबसे बड़ा दुश्मन : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
भवनगर, अमर उजाला ब्यूरो।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देशवासियों को आत्मनिर्भरता का मंत्र देते हुए कहा है कि भारत का सबसे बड़ा दुश्मन कोई और देश नहीं, बल्कि वह मानसिकता है, जिसमें हम दूसरों पर निर्भर रहते हैं। यदि हमें दुनिया के सामने सम्मान पाना है, तो हमें आत्मनिर्भर बनना ही होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर हम दूसरों पर निर्भर रहेंगे, तो हमारी आत्मा, हमारा आत्मविश्वास और हमारा आत्मसम्मान भी चोटिल होगा। यही वजह है कि आज आत्मनिर्भर भारत का संकल्प सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि यह एक राष्ट्रीय अभियान बन चुका है।
आत्मनिर्भरता ही सारे दुखों की दवा
मोदी ने कहा कि आत्मनिर्भरता ही सारे दुखों की असली दवा है। जब तक हम दूसरे देशों से हर ज़रूरत पूरी करने की आदत से बाहर नहीं आएंगे, तब तक हम कभी भी सशक्त नहीं बन पाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब भारत अपने संसाधनों का उपयोग स्वयं करेगा और बाहरी देशों पर निर्भरता को खत्म करेगा।
आत्मनिर्भर भारत की चुनौती
प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर बनने की राह आसान नहीं है। इसके लिए हमें चुनौतियों से जूझना होगा और कठिनाइयों का सामना करना होगा। लेकिन यदि हम दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें, तो कोई ताकत हमें आत्मनिर्भर भारत बनाने से रोक नहीं सकती।
मोदी ने उदाहरण देते हुए कहा कि आज भारत हर साल लाखों करोड़ रुपये दूसरे देशों से सामान खरीदने में खर्च करता है। यह पैसा हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बजाय विदेशी कंपनियों को ताकत देता है। यदि यही पैसा भारत में खर्च हो, तो हमारे देश की ताकत और कई गुना बढ़ जाएगी।
रक्षा बजट और आत्मनिर्भरता
मोदी ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज भारत का रक्षा बजट जितना पैसा विदेशी कंपनियों पर खर्च कर रहा है, अगर उसका आधा हिस्सा भी देश की रक्षा उत्पादन कंपनियों पर लगाया जाए, तो भारत रक्षा सामग्री बनाने में आत्मनिर्भर हो सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा उपकरण आयातकों में से एक रहा है, लेकिन अब भारत ने तय कर लिया है कि वह अपने रक्षा क्षेत्र को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएगा। आने वाले समय में भारत न केवल अपने लिए हथियार बनाएगा, बल्कि दुनिया के अन्य देशों को भी निर्यात करेगा।
युवाओं और किसानों का योगदान
प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल सरकार का काम नहीं है, बल्कि इसमें युवाओं, किसानों, वैज्ञानिकों और उद्योगपतियों का भी योगदान जरूरी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्टार्टअप और नई तकनीक के माध्यम से भारत को आत्मनिर्भर बनाने में भागीदारी करें।
किसानों की ओर इशारा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत का किसान आत्मनिर्भर होगा, तभी भारत का गाँव आत्मनिर्भर बनेगा। और जब गाँव आत्मनिर्भर होगा, तभी भारत सशक्त और सम्पन्न राष्ट्र बनेगा।
वैश्विक प्रतिस्पर्धा और भारत
मोदी ने यह भी कहा कि दुनिया में वही राष्ट्र आगे बढ़ते हैं, जो आत्मनिर्भर होते हैं। यदि भारत को भी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी पहचान बनानी है, तो हमें आत्मनिर्भरता को अपनाना ही होगा।
उन्होंने कहा कि भारत के पास अपार प्राकृतिक संसाधन, युवा जनशक्ति और ज्ञान परंपरा है। यदि इनका सही उपयोग किया जाए, तो भारत को दुनिया की किसी भी ताकत पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं होगी।
आत्मनिर्भर भारत और 2047 का संकल्प
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत 2047 में स्वतंत्रता की शताब्दी मनाएगा, तब तक भारत को आत्मनिर्भर बनाना ही हमारा सबसे बड़ा लक्ष्य है। यह संकल्प केवल प्रधानमंत्री या सरकार का नहीं है, बल्कि यह 140 करोड़ भारतीयों का साझा संकल्प होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा, जब हर भारतीय यह निश्चय करेगा कि वह “मेड इन इंडिया” को प्राथमिकता देगा और विदेशी वस्तुओं पर निर्भरता कम करेगा।
प्रधानमंत्री का स्पष्ट संदेश
मोदी ने अंत में कहा कि अगर भारत को दुनिया में सम्मानित स्थान चाहिए, तो हमें दूसरों पर आश्रित रहना छोड़ना होगा। आत्मनिर्भरता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने कहा, “दूसरे देशों पर निर्भर रहना भारत का सबसे बड़ा दुश्मन है। हमें इस दुश्मन को हराना होगा और आत्मनिर्भर भारत का निर्माण करना होगा।”
