यह खबर भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में जीएसटी (GST) दरों में बदलाव और इसका त्योहारी सीजन पर पड़ने वाले असर को लेकर है। इस समाचार में बताया गया है कि वाहन कंपनियां जीएसटी की दरें घटने के बाद उपभोक्ताओं को लाभ तो देंगी, लेकिन त्योहारी सीजन में छूट जैसे ऑफर मिलने की संभावना कम है, क्योंकि कंपनियां अपनी मार्जिन (मुनाफे) को बढ़ाने पर ज्यादा जोर देंगी।
जीएसटी बदलाव का असर
नई जीएसटी दरें 22 सितंबर 2025 से लागू हो रही हैं। इसमें पेट्रोल/LPG/CNG इंजन वाली छोटी कारें (1,200 सीसी तक, 4 मीटर से कम लंबाई) और डीजल कारें (1,500 सीसी तक) अब 18 प्रतिशत जीएसटी पर आएंगी। बड़ी और लग्जरी गाड़ियों पर 40 प्रतिशत टैक्स लगेगा, जबकि पहले इसमें उपकर (सेस) मिलाकर करीब 50 प्रतिशत टैक्स हो जाता था। इस बदलाव का सीधा लाभ मध्यम और छोटे कार उपभोक्ताओं को होगा, क्योंकि कई कारें अब पहले से सस्ती मिल सकेंगी।
कंपनियों का नजरिया
मोटिवाल ओसवाल, सुजुकी इंडिया जैसी रिपोर्ट्स के अनुसार, वाहन निर्माता कंपनियों को उम्मीद है कि बाजार में मांग बढ़ेगी, लेकिन यह मांग मुख्य रूप से त्योहारी सीजन के बाद आएगी। कंपनियों का फोकस ग्राहकों को छूट देने पर नहीं, बल्कि अपनी मुनाफे की दर बढ़ाने पर रहेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ कंपनियां तो 24 फीसदी तक अपनी कुछ कारों के दाम घटा सकती हैं, लेकिन सभी ब्रांड्स एक जैसी छूट नहीं देंगी।
किस तरह की छूट मिल रही है
मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स, महिंद्रा, बीएमडब्लू, मर्सडीज-बेंज, जगर लैंड रोवर जैसी कंपनियों ने छोटी और मिड-सेगमेंट कारों में 75 हजार से डेढ़ लाख रुपये तक, और लग्जरी कारों पर 5 लाख से 30 लाख रुपये तक कीमत घटाने की घोषणा की है। उदाहरण के तौर पर, टाटा मोटर्स की कुछ गाड़ियां 3.49 लाख रुपये सस्ती हुई हैं, जबकि बीएमडब्ल्यू की एक्स7 मॉडल 9 लाख रुपये तक सस्ती हो गई है। हर कंपनी मॉडल के हिसाब से अलग-अलग छूट दे रही है।
त्योहारों में छूट की संभावना क्यों कम है?
रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनियां इस बदलाव का फायदा अपने मार्जिन सुधारने और आगामी क्वार्टर का लाभ बढ़ाने में लगाएंगी। क्योंकि त्योहारी सीजन में पहले ही कारों की मांग ज्यादा रहती है, इसीलिए कंपनियां छूट या ऑफर देने के बजाय, आम दिनों की तुलना में दाम को स्थिर ही रखेंगी या सीमित खरीदारों के लिए ही ऑफर आएंगे। ऐसी संभावना है कि छूट वाले बड़े ऑफर्स नए साल या बम्पर सेल में ही देखने को मिलेंगे।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि 2025-26 और आगे 2026-27 में वॉल्यूम ग्रोथ यानी बिक्री की रफ्तार और बढ़ सकती है। जीएसटी की नई संरचना से कंपनियों की लागत में भी सुधार होगा, और खरीदारी का माहौल बेहतर होगा। छोटे और मध्यम वर्ग की खरीद क्षमता में वृद्धि की संभावना है। साथ ही, सेकंड हैंड कारों की बिक्री में भी तेजी आने की संभावनाएं हैं।
उपभोक्ता के लिए सीधा लाभ
इस बदलाव का महत्त्व यह है कि अब कार खरीदना कुछ हद तक सस्ता हो जाएगा, खासकर छोटी और मिड-सेगमेंट की गाड़ियों के लिए। ग्राहक को औसतन 5-8% तक की बचत हो सकती है। जिन लोगों ने कार का लोन लिया है, वे भी किस्त में कुछ कमी देख सकते हैं।
इस पूरी खबर का सार यही है कि जीएसटी दरों में बदलाव से कारों के दाम कम हो रहे हैं, लेकिन त्योहारी सीजन में छूट या बंपर ऑफर की उम्मीद कम है क्योंकि कंपनियां अपनी लाभ की स्थिति को मजबूत करना चाहती हैं। हालांकि, लॉंग टर्म में ओटो सेक्टर एवरेज ग्राहकों को इसका फायदा जरूर मिलेगा, और भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी होगा।